फोन टैपिंग केस: CM अशोक गहलोत को कोर्ट से नोटिस, जानिए राजस्थान के चर्चित मामले की इनसाइड स्टोरी

जयपुर, 6 मार्च। जयपुर की एक अदालत ने कथित फोन टैपिंग मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई अन्य अधिकारियों को 16 मार्च को पेशी का नोटिस जारी किया है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय संख्या-3 ने कथित फोन टैपिंग मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, जलदाय और भूजल विभाग मंत्री महेश जोशी व अन्य को 16 मार्च को अदालत में पेश होने का नोटिस जारी किया है। नोटिस शनिवार को जारी किया गया।

Rajasthan Phone Tapping Case Notice to CM Ashok Gehlot from the court know the inside story

सीएम गहलोत के अलावा अदालत ने पूर्व मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह, पूर्व पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र सिंह, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के अतिरिक्त महानिदेशक अशोक राठौड़, एसओजी थाने के थानाधिकारी रविंद्र कुमार भूरिया और मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारी (ओएसडी) लोकेश शर्मा को भी नोटिस जारी किया है। एडवोकेट ओपी सोलंकी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर नोटिस जारी किया गया है। अदालत के आदेश के मुताबिक इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को है।

दिल्ली क्राइम ब्रांच में भी दर्ज है मामला
आपको बता दें कि सोलंकी ने पिछले साल जुलाई, 2020 के फोन टैपिंग मामले में राजनीतिक संकट के दौरान सरकारी रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने के लिए देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग को लेकर निचली अदालत में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। सोलंकी ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायालय नंबर-3 की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। गौरतलब है कि कथित फोन टैपिंग मामले में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की शिकायत दिल्ली क्राइम ब्रांच में भी मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में पूछताछ के लिए मुख्यमंत्री के ओएसडी शर्मा भी क्राइम ब्रांच के सामने पेश हो चुके हैं।

विधायकों की फोन टैपिंग के लगे थे आरोप
उल्लेखनीय है कि जुलाई 2020 में सचिन पायलट और कांग्रेस के कुछ अन्य विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बगावती तेवर अपनाए जाने के बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों को लंबे समय तक अलग-अलग होटलों में रखा था। इस दौरान विधायकों के फोन टेप किए जाने के आरोप लगे थे हालांकि अधिकारियों व सरकार की ओर से इसका लगातार खंडन किया गया। इसी दौरान शर्मा द्वारा शेयर की गई आडियो क्लिप सामने आई थीं।

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महेश जोशी ने दर्ज कराई थी एफआईआर
दूसरी ओर विधानसभा में मुख्य सचेतक महेश जोशी ने इन ऑडियो क्लिप के आधार पर ही राजस्थान पुलिस के विशेष कार्यबल (एसओजी) एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में सरकार को अस्थिर करने के षड्यंत्र के संबंध में एफआईआर दर्ज करवाई थी। कांग्रेस नेताओं के आरोपों के अनुसार ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर गजेंद्र सिंह व एक कांग्रेस नेता की बातचीत है। हालांकि एफआईआर में यह नहीं कहा गया है कि गजेंद्र सिंह केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह है।

क्या था ऑडियो क्लिप में?
दरअसल राजस्थान में तीन ऑडियो टेप सामने आए थे और इनमें कथित तौर पर दो व्यक्ति सरकार को गिराने के लिए विधायकों को पैसे देने की बात करते हुए सुने गए थे। कांग्रेस नेताओं के आरोपों के अनुसार ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर गजेंद्र सिंह व एक कांग्रेस नेता भंवरलाल शर्मा की बातचीत है। हालांकि, शर्मा और शेखावत, दोनों ही इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर चुके हैं।

परिवाद में सीएम गहलोत के ओएसडी पर ये आरोप
वहीं परिवाद में कहा गया है कि ऑडियो वायरल करने वाले लोकेश शर्मा मुख्यमंत्री के ओएसडी हैं और वह लोक सेवक की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में उनका इस तरह ऑडियो वायरल करना ठीक नहीं है। यह मामला IPC, OS एक्ट और टेलीग्राफ एक्ट की अवहेलना है। इस ऑडियो को ही सबूत मानकर महेश जोशी ने एसओजी में IPC की धारा 120बी और 124ए के तहत केस दर्ज कराया। जिसकी जांच दिल्ली क्राइम ब्रांच कर रही है। हालांकि शर्मा ने फोन टैपिंग में संलिप्तता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने तो केवल सोशल मीडिया पर उपलब्ध क्लिप को फॉरवर्ड किया था ताकि कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने के षड्यंत्र का खुलासा हो।

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