मिड-डे मील योजना : एक जुलाई से स्कूलों में बच्चों को दूध पिलाएगी राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार

मिड-डे मील योजना : राजस्थान सरकार एक जुलाई से स्कूलों में बच्चों को पिलाएगी दूध

जयपुर, 13 जून। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सेहत सुधारने के लिए अशोक गहलोत सरकार अब उन्हें मिड-डे मील खाने के साथ एक गिलास दूध भी पिलायेगी. आगामी 1 जुलाई से शुरू होने वाली इस योजना को लेकर सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है. लेकिन बच्चों के पोषण पर काम करने वाले कई संगठनों ने सरकार की इस योजना पर कई तरह के सवाल उठाये हैं.

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पूर्व में गहलोत सरकार ने पूर्ववर्ती बीजेपी की वसुंधरा राजे सरकार की इस दूध योजना में गफलत होने और इसके कारगर नहीं होने का आरोप लगाते हुए बंद किया था. लेकिन अब पैकिंग दूध देकर योजना को शुरू करने पर मुहर लगा दी है. सरकारी स्कूलों में कई बच्चे ऐसे भी होते हैं जिनके घरों में भोजन का खर्च तक मुश्किल से निकल पाता है. ऐसे में इन बच्चों के स्वास्थ्य पर खासा नकारात्मक असर पड़ता है. इसकी वजह से प्रदेश में कुपोषित बच्चों के आंकड़े बड़ी संख्या में सामने आते हैं.

ऐसे में बच्चों की सेहत के सुधार के लिए गहलोत सरकार मिड-डे मील के साथ अब दूध का खर्चा वहन करेगी. सीएम गहलोत की बजट घोषणा को वित्त विभाग की मंजूरी मिलने के बाद करीब 70 लाख स्कूली बच्चों को 1 जुलाई से सप्ताह में दो दिन डिब्बे के दूध का गिलास मिलेगा.

पाउडर से तैयार दूध दिया जाएगा

सरकार की योजना के अनुसार कक्षा एक से 5 तक के बच्चों को 15 ग्राम दूध के पाउडर को गर्म पानी में मिलाकर दिया जायेगा. 15 ग्राम दूध पाउडर से 150 मिलीलीटर दूध तैयार होता है. इसी तरह कक्षा 5 से 8 तक के बच्चों को 20 ग्राम दूध के पाउडर को गर्म पानी में मिलाकर दिया जायेगा. 20 ग्राम दूध पाउडर में 200 मिलीलीटर दूध की मात्रा होगी.

मुख्यमंत्री ने बजट 2022-23 में की थी घोषणा

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2022-23 की बजट घोषणा में मिड-डे मील योजना के तहत कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को सप्ताह में दो दिन डिब्बे का गर्म दूध उपलब्ध कराने के लिए 476.44 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वित्त का प्रावधान किया था. उसे पिछले दिनों सीएम गहलोत ने वित्तीय मंजूरी दे दी है.

जानकारी के अनुसार राजकीय विद्यालयों में मिड-डे मील की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसी वित्तीय वर्ष में आगामी एक जुलाई से सप्ताह में दो दिन पाउडर मिल्क का उपयोग करते हुए मीठा गर्म दूध उपलब्ध कराया जाएगा. राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन से विद्यालय स्तर पर दूध पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी.

पिछली सरकार की फेल योजना पुनः शुरू

उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार ने स्कूली बच्चों को दूध पिलाने के लिए 'अन्नपूर्णा दूध योजना' शुरू की थी. लेकिन उस वक्त बच्चों को न तो दूध का स्वाद पसंद आया था और न ही उस दूध की गुणवत्ता अच्छी थी. इसके चलते गहलोत सरकार ने योजना को कोरोना संक्रमण के समय बंद कर दिया था. अब मौजूदा सरकार ने पाउडर का दूध बच्चों को पिलाने की यह योजना तैयार की है. ऐसे में इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

स्कूलों में पानी ही साफ नहीं है तो दूध कैसे अच्छा होगा

बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता छाया पचौरी ने कहा कि यह सही है कि दूध प्रोटीन और विटामिन का प्राकृतिक स्रोत है. लेकिन गुणवत्ता और बच्चों की पसंद का भी ध्यान रखना जरूरी है. सरकार को पूरे राजस्थान में इसे लागू करने से पहले कुछ स्कूलों में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करना चाहिए ताकि यह पता लग सके कि बच्चों को पावडर का दूध पसंद आ भी रहा है या नहीं. छाया ने कहा कि प्रदेश के कई स्कूलों में पीने का साफ पानी तक उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में उस पानी में बच्चों को कैसे दूध का पाउडर मिलाकर पिलाया जा सकता है.

कुपोषण दूर करने के लिए उठाए कदम

राजस्थान में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों को देखें तो मौजूदा वक्त में 31.8 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिनकी उम्र के हिसाब से लंबाई नहीं बढ़ रही है. इसके साथ ही 16.8 फीसदी वे बच्चे हैं जिनका लंबाई के लिहाज से वजन कम है. 27.6 प्रतिशत बच्चे उम्र के लिहाज से अंडर वेट हैं. 71.5 फीसदी बच्चों में खून की कमी है.

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