पंजाब: गन्ना काश्तकारों के लिए बड़ी खबर, CM भगवंत मान ने गन्ना मिलों को दिए ये आदेश
जालंधर। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य की शूगर मिलों को समय पर मिल चलाने के आदेश दिए है, तांकि गन्ना किसानों को शूगर मिलों तक गन्ना पहुंचाने के लिए लंबी कतारों में खड़ा ना होना पड़े। उन्होंने कहा कि मिल समय पर चालू होने से किसानों को अपनी गन्ने की ट्राली सड़कों पर खड़ी नहीं करनी पड़ेगी। पंजाब सरकार ने इस बार गन्ने की कीमत 360 रुपए से बढ़ा कर 380 रुपए प्रति क्विंटल कर दी है। इससे गन्ना किसानों को अब 380 रुपए का मूल्य मिलेगा। भगवंत मान ने कहा कि सरकार ने गन्ना किसानों के मामले हल कर दिए और सरकार कृषि क्षेत्र प्रति बहुत गंभीर है ।

बता दें कि पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री मान ने सदन में कहा था कि आगामी पिड़ाई सीजन से किसानों को गन्ने का स्टेट ऐग्रीड प्राइस (एस.ए.पी.) 20 रुपए प्रति क्विंटल अधिक मिलेगा। इससे गन्ने का भाव 360 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 380 रुपए प्रति क्विंटल हो गया था। इस फैसले से सरकारी खजाने पर 200 करोड़ रुपए साल का भार पड़ना है।
प्राइवेट शूगर मिलों ने रोकी पिड़ाई
मान की तरफ से गन्ना किसानों को दी गई इस राहत पर प्राइवेट शूगर मिलों ने पानी फेरने की तैयारी कर ली है। राज्य की प्राइवेट शूगर मिलों ने वर्तमान सरकार नीति के चलते गन्ना बांड और पिड़ाई का काम रोक दिया है। प्राईवेट शूगर मिल एसोसिएशन पंजाब ने इस बात का ऐलान किया है। शूगर मिल मालिकों ने स्पष्ट किया है कि पंजाब सरकार द्वारा गन्ने की कीमत 380 रुपए प्रति क्विंटल तय किए जाने के कारण शूगर मिल गन्ना की पिड़ाई नहीं कर पा रही हैं।
नए गन्ना खरीद मूल्य पर ऐतराज
प्राइवेट शूगर मिल किसानों को पिछले साल के खरीद मूल्य जोकि 325 रुपए प्रति क्विंटल तय था, के हिसाब से भी भुगतान नहीं कर पा रही हैं। यही कारण है कि कई मिलों की तरफ किसानों का बकाया अभी भी खड़ा है लेकिन 380 रुपए प्रति क्विंटल के मूल्य अनुसार मिलों के लिए किसानों की अदायगी बिल्कुल भी संभव नहीं होगी। इसके साथ ही मिल मालिकों ने केंद्र तथा पंजाब सरकार की तरफ से तय गन्ने के मूल्य में बड़े अंतर पर भी सवाल खड़ा किया है। मिल मालिकों ने कहा है कि गन्ने का मूल्य 380 रुपए प्रति क्विंटल देने के लिए गन्ने के राज्य सरकार द्वारा ऐलान किए गए खरीद मूल्य और भारत सरकार द्वारा गन्ने के निश्चित किए खरीद मूल्य (एफ.आर.पी.) जोकि 305 रुपए है, का अंतर पंजाब सरकार को देना चाहिए।












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