ओडिशा वित्त विभाग को भरोसा, 'GSDP के 25 फीसदी की सीमा के भीतर ही रहेगा सार्वजनिक ऋण'

ओडिशा में तीन सालों में यानी 2026-27 में कुल सार्वजनिक ऋण के जीएसडीपी के लगभग 16.7 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है।

ओडिशा का ऋण स्तर अब निर्धारित सीमा के अंदर है और वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक इसके महज 4 प्रतिशत तक बढ़ने के आसार हैं। सार्वजनिक ऋण को लेकर ओडिशा वित्त विभाग की तरफ से प्रकाशित स्टेटस पेपर में इस बात का खुलासा हुआ है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022-23 के संशोधित अनुमान के अनुसार राज्य का कुल बकाया सार्वजनिक ऋण 97,037 करोड़ रुपये था, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 12.7 प्रतिशत है।

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रिपोर्ट बताती है कि अगले तीन सालों में यानी 2026-27 में कुल सार्वजनिक ऋण के जीएसडीपी के लगभग 16.7 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है, जो कि 25 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर होगा।

15वें वित्त आयोग और ओडिशा एफआरबीएम अधिनियम 2005 में ऋण को जीएसडीपी अनुपात में 25 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रावधान है। ओडिशा का वर्तमान ऋण स्तर निर्धारित ऋण सीमा के भीतर है। इसके अलावा, ऋण स्टॉक केंद्र सरकार की तुलना में काफी कम है, जो कि केंद्रीय बजट के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद का 57 प्रतिशत है।

सरकार को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2023-24 के अंत तक कुल ऋण स्टॉक बढ़कर 1,12,882 करोड़ रुपये हो जाएगा। इसके बाद फिर से यह 2024-25 में 1.40 लाख करोड़ रुपये, 2025-26 तक 1.72 लाख करोड़ रुपये और 2026-27 के अंत तक बढ़कर 2.09 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा।

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