रांची में चौराहों पर स्मार्ट स्क्रीन से मिलेगी लोगों को मौसम की जानकारी, आब्जर्वेशन नेटवर्क का भी होगा विस्तार

शहर के मुख्य चौक चौराहों पर स्मार्ट स्क्रीन पर मौसम की सटीक जानकारी प्रदर्शित करने की भी योजना है। लोगों को मौसम की जानकारी एसएमएस के जरिए दी जाएगी।

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रांची। राज्य में मौसम के सटीक विश्लेषण की तैयारियां की जा रही हैं। आब्जर्वेशन नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। इस नेटवर्क विस्तार से मौसम विज्ञान केंद्र रांची को 80 नहीं, बल्कि 250 जगहों से मौसम से संबंधित जानकारी प्राप्त होगी, जिसके बाद आमजनों व किसानों को सटीक जानकारी उपलब्ध हो पाएगी।

वहीं दूसरी ओर रांची स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत रांची शहर के प्रमुख चौक चौराहों पर मौसम की सही जानकारी स्मार्ट स्क्रीन पर देने की भी योजना है। एसएमएस के माध्यम से मौसम अपडेट लोगों तक पहुंचाए जाएंगे। इसके अलावे राज्य में 18 आटोमेटिक वेदर स्टेशन को डेवलप किया जा रहा है।

आब्जर्वेशन नेटवर्क का लगातार किया जा रहा विस्तार
बता दें कि रांची मौसम विज्ञान केंद्र को पहले 80 जगह से वर्षा की सूचना मिलती थी, जिसे अपग्रेड करने के बाद फिलवक्त 150 जगहों से सूचना मिल रही है और साल के अंत तक 250 जगहों से मौसम संबंधी सूचना लिए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र के वरीय विज्ञानी अभिषेक आनंद ने कहा कि आब्जर्वेशन नेटवर्क का लगातार विस्तार किया जा रहा है। टूरिज्म प्लेस पर वैरिएबल मैसेज साइन बोर्ड लगाए जाने की योजना है, जिसे धीरे-धीरे पूरे झारखंड में विस्तार दिया जाएगा।

थंडर स्टार्म टेस्ट बेड प्रोजेक्ट को दी जाएगी गति
थंडर स्टार्म टेस्ट बेड प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है। रांची के कई ऐसे इलाके हैं जहां वज्रपात के कारण काफी नुकसान व हादसे होते हैं। इस प्रोजेक्ट के बाद वज्रपात के कारण होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा। अभिषेक आनंद ने कहा कि फिलहाल रांची के अलावे जमशेदपुर और डाल्टेनगंज में 3 विभागीय वेधशाला, बोकारो और चाईबासा में 2 अंशकालिक वेधशाला और 18 कार्यात्मक स्वचालित मौसम स्टेशन शामिल है।

आम जनता से भी मांगी जा रही है सलाह
जिलावार वर्षा निगरानी योजना, 3 विभागीय वेधशाला, 150 गैर-विभागीय वेधशाला, जो वास्तविक वर्षा के संग्रह के लिए पूरी तरह से तैयार है। समाज की सुरक्षा और भलाई के लिए मौसम, जलवायु और जल विज्ञान सेवाओं के आवश्यक योगदान को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। आमजनों से भी उनकी सलाह मांगी जा रही है ताकि उसी अनुरुप विभाग के संसाधनों को अपडेट किया जा सके।

उन्होंने कहा कि राज्य में तीन में से एक व्यक्ति अभी भी पूर्व चेतावनी प्रणाली से पर्याप्त रूप से आच्छादित नहीं है। राष्ट्रीय मौसम विज्ञान और जल विज्ञान सेवाओं, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और विकास एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बेहतर रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए कार्य किया जा रहा है।

कितना मिलेगा आब्जर्वेशन नेटवर्क का लाभ
दरअसल, मौसम विभाग आब्जर्वेशन नेटवर्क को स्थानीय तौर पर विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके लिए हरेक जिले में पार्ट टाइम सूचना तंत्र को विकसित किया जा रहा है। जो पल पल का मौसमी अपडेट विभाग को मुहैया कराएगा। बताया जा रहा है कि मौसम से संबंधित जितना अधिक आब्जर्वेशन यानी सूचना सामने आएगी पूर्वानुमान की सटीकता उतना ही अधिक व्यापक होगी।

20 करोड़ की लागत से तैयार होगा थंडर स्ट्राम प्रोजेक्ट
अभिषेक आनंद ने बताया कि पूरे राज्य में मौसम विभाग को अपडेट किया जा रहा है। आईएमडी के दिशा निर्देश पर करीब 20 करोड़ की लागत से जहां थंडर स्ट्राम प्रोजेक्ट को तैयार किया जाएगा वहीं करीब 7 से 10 लाख रुपये की लागत से आटोमैटिक वेदर स्टेशन को अपग्रेड किया जाएगा। थंडर स्ट्राम प्रोजेक्ट केंद्र सरकार का प्रोजेक्ट है और इसके लिए राज्य के कई हिस्सों में केवीके या फिर राज्य सरकार से जमीन ली जाएगी। इसके लिए तीन तीन माह पर चार चरणों में कार्य पूरा किया जाएगा।

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