पराली प्रबंधन को किसानों के सात हथियार, हरियाणा सरकार साथ देने को तैयार
हिसार। पराली प्रबंधन में आधुनिक कृषि यंत्र काफी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यही कारण है कि सरकार कस्टम हायरिंग सेंटरों की संख्या अधिक बढ़ा रही है। फसल अवशेष प्रबंधन में प्रयोग होने वाले यह सात उपकरण आमतौर पर किसानों के लिए किसी हथियार से कम नहीं है। जो खेती बचाने, लोगों के जीवन को स्वस्थ रखने में मदद कर रहे हैं। सरकार इन उपकरणों पर 50 से 80 फीसद तक छूट भी दे रही है। व्यक्तिगत मशीन लेने पर 50 फीसद और कस्टम हायरिंग सेंटर के जरिए मशीन लेने पर 80 फीसद छूट दी जाती है।

हैप्पी सीडर
पराली को खेतों से बिना निकाले गेहूं की सीधी बिजाई करने के लिए कृषि विज्ञानियों ने हैप्पी सीडर मशीन के रुप में एक समाधान निकाला है। हैप्पी सीडर, पराली संभालने वाला रोटर व जीरो टिल ड्रिल का मिश्रण है। इसमें रोटर धान की पराली को दबाने का काम करता है व जीरो टिल ड्रिल गेहूं की बुवाई का काम करती है। इस मशीन में फ्लेल किस्म के ब्लेड लगे होते हैं, जो कि ड्रिल के बिजाई करने वाले फाले के सामने आने वाली पराली को काट कर पीछे को धकेलते हैं इससे मशीन के फालों में पराली नही फंसती और बीज को सही ढंग से बिखेरा जा सकता है।
यह मशीन 45 हार्स परवर या इससे ज्यादा शक्ति के ट्रैक्टर के साथ चलाई जा सकती है, यह मशीन एक दिन में छह से आठ एकड़ में बिजाई कर सकती है। हैप्पी सीडर के कई फायदे हैं। जिसमें हैप्पी सीडर से कटी हुई पराली मल्च का काम करती है, जिससे देर तक खेतों में नमी बरकरार रहती है। खेतों में मल्च होने के कारण मिट्टी में पानी का वाष्पीकरण कम होता है और पानी की बचत होती है। मल्च मिट्टी का तापमान बरकरार रखती है जो कि गेहूं की अच्छी उपज में सहायक सिद्ध होती है।इस तकनीक से बुआई करने से सिंचाई के पानी की भी बचत होती है। पराली को आग ना लगाने से वातावरण दूषित नही होता है व मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
इस तकनीक से गेहूं की बुआई समय से की जा सकती है।-इस मशीन से बुआई करने पर गेहूं में खरपतवार कम होते हैं, जिस कारण खरपतवार नाशक पर भी कम खर्च होता है। हैप्पी सीडर से कम खर्च में खेत की तैयारी की जा सकती है। हैप्पी सीडर से की गई गेहूं की कटाई के तुरंत बाद बिना सिंचाई किए 60 दिनों में तैयार की जाने वाली मूगं की बुआई भी की जा सकती है। यह मशीन सवा लाख रुपये से दो लाख रुपये तक कीमत की है। जिस पर सरकार 50 फीसद की छूट भी दे रही है।
मल्चर- मल्चर एक प्रकार का कृषि यंत्र है जिसे खेतों में ट्रैक्टर के पीटीओ से जोड़कर चलाया जाता है। इस यंत्र की मदद से गेहूं , गन्ना, धान आदि की फसलों के अवशेषों को कांटकर नष्ट कर उन्हें मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इस प्रकार से ये अवशेषों को जलाने से बेहतर विकल्प है। यह यंत्र फसल क्षेत्र को साफ करने और अगले बुवाई के मौसम के लिए तैयार करने में मदद करता है। इस यंत्र के बाग बगीचों में भी झाड़ी, फल- सब्जियों के अवशेष आदि काटकर नष्ट करने जैसे कई अन्य अनुप्रयोग भी है। इसका प्रयोग फसल अवशेषों को जलाने से बेहतर विकल्प है, फसल अवशेषों को जलाने ना केवल पर्यावरण को नुकसान होता है वहीं कृषि भूमि को भी नुक़सान होता है। मल्चर अवशेषों को काटकर मिट्टी में मिला देता है जिससे मिट्टी उर्वरकता बढ़ती है और पिछली फसल के अवशेष आने वाली फसलों के लिए जैविक उर्वरक का काम करते हैं। गन्ने की कटाई के लिए यह एक उपयोगी उपकरण है, साथ ही मिट्टी की सतह से कई फसलों के पौधों को कांटने के लिए यह सबसे कारगर कृषि उपकरण है। यह मशीन डेढ़ लाख से दो लाख रुपये तक आती है। सरकार इस मशीन पर लागत का 50 फीसद छूट देती है।
जीरो टिल सीड ड्रिल- जीरो टिलेज सीड कम फर्टी ड्रिल से गेहूं की बुआई धान की कटाई के तुरंत बाद नमी का उपयोग करके बिना जुते हुए खेत में एक निश्चित गहराई मे मिट्टी के नीचे खाद तथा बीज को लाइन में बनाए गए कूड़ों में रखना इस मशीन का मुख्य कार्य है। इस मशीन से एक ही गहराई पर बीज बोने से समय पर अच्छा जमाव होता है साथ ही साथ समय की बचत भी होती है. लाइन में फसल होनें के कारण सिंचाई, निराई, कटाई आदि आसानी से होती है. इस मशीन में बीज बक्सा, खाद बक्सा, बीज की मात्रा सेट करनें वाला लीवर, बीज का आकार सेट करनें वाला लीवर, धरातल पहिया एवं फार मुख्य भाग है। यह मशीन 50 हजार से 75 हजार रुपये तक आती है।सरकार इस मशीन पर लागत का 50 फीसद छूट देती है।
रोटावेटर- रोटावेटर एक ट्रैक्टर के साथ कार्य करने वाली मशीन है। जिसका मुख्य रूप से खेतों में उपयोग बीज की बुआई के समय किया जाता है। रोटावेटर मक्का, गेहूं, गन्ना आदि के अवशेष को हटाने अथवा इसके मिश्रण करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। रोटावेटर के उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार भी आता है। इसके साता ही धन, लागत, समय और ऊर्जा आदि की भी बचत होती है। रोटावेटर को किसी भी प्रकार की मिट्टी की जुताई में प्रयोग किया जा सकता है। रोटवेटर को मिट्टी की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार समायोजित किया जा सकता है। इसका उपयोग किसी भी फसल के लिए विशेष रूप से उथल-पुथल के लिए किया जा सकता है चाहे फसल गन्ना, कपास, केला और ज्वार आदि ही ना हो। रोटावेटर के उपयोग में अन्य यंत्रो की अपेक्षा 15त्न से 35 फीसद तक ईंधन की बचत हो जाती है। यह मिट्टी को तुरंत तैयार कर देता है जिससे पिछली फसल की मिट्टी की नमी का पूर्णतया उपयोग हो जाता है।यह गीले क्षेत्रो में भी आसानी से कार्य कर सकता है। यह मशीन 90 हजार रुपये से 1.10 लाख रुपये तक की आती है। सरकार इस मशीन पर लागत का 50 फीसद छूट देती है।
सुपर सीडर- कंबाइन से कटे धान के खेतों में बिना खेत जुताई किए गेहूं की सीधी बिजाई अच्छे से करती है। क्योंकि इस कृषि यंत्र में आगे की तरफ ब्लेड लगे होते हैं जो कंबाइन से कटने के बाद बचे हुई फानों को काटकर बारीक कर मिट्टी में मिला देते हैं। जिससे पराली को आग लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस मशीन के पीछे एक रोलर लगा होता है। जो मिट्टी और फसल अवशेषों को हल्का दबा देता है। रोलर के पीछे डिस्क होती है जिससे लाइन बनती है और बिजाई सीधी हो जाती है। इसमें धान की कटाई के बाद तुरंत गेहूं की बुआई की जा सकती है। जिससे धान व गेहूं की लंबे समय की किस्में उगाईं जा सकती हैं। इसके प्रयोग से मिट्टी में खरपतबार कम उगते हैं और गुणवत्ता बनी रहती है। यह मशीन डेढ़ लाख से ढाई लाख रुपये तक की आती है। सरकार इस मशीन पर लागत का 50 फीसद छूट देती है।
स्ट्रा बेलर- स्ट्रा बेलर ट्रैक्टर के पीछे जोड़ा जाता है। ये कंबाइन से धान व गन्ने की कटाई के बाद जो कटा हुआ फसल अवशेष खेत में बचता है। उसको इकट्ठा करके उसकी गांठ बनाता है। जिन्हें फैक्ट्रियों में बेचा जा सकता है या किसी और काम लाया जा सकता है। लेकिन खेत में बगैर कटे फसल अवशेष को काटने के लिए अलग से रोटरी श्लेशर की जरूरत पड़ती है। यह मीशन नौ लाख से 13 लाख रुपये तक आती है। सरकार इस मशीन पर लागत का 50 फीसद छूट देती है। इसकी क्षमता एक एकड़ प्रति घंटा है।
सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम- पहले से मौजूद कंबाइनों में यह मशीन न लगी होने के कारण धान की फसल की कटाई करने के बाद खेत में काफी बड़े-बड़े फाने या फसल अवशेष छूट जाते हैं। किसान इन अवशेषों में आग लगा देते हैं। मगर सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम इस समस्या से मुक्ति देता है। इसको कंबाइन के पिछले हिस्से में लगाकर धान की फसल की कटाई की जाए तो मशीन कटाई के साथ-साथ फसल अवशेषों को भी बारीक काटकर खेतों में मिला देती है। जिससे फसल अवशेषों को जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह मशीन एक लाख से एक 1.20 लाख रुपये की कीमत की है। सरकार इस मशीन पर लागत का 50 फीसद छूट देती है।












Click it and Unblock the Notifications