नई नियोजन नीति पर साजिश कर रहा विपक्ष, 1932 रहेगा मुद्दा; बोकारो में बरसे सीएम हेमंत

मुख्यमंत्री हेमंत सोरन गुरुवार को बोकारो के नावाडीह में विपक्ष पर खूब बरसे। उन्होंने कहा कि 1932 हमारा मुद्दा था, है और रहेगा। जब हमने 1932 खतियान आधारित नियोजन नीति शुरू की तो भाजपा-आजसू वाले कोर्ट चले गए। आज जब फिर से नई नियोजन नीति लाई गई तो विपक्ष साजिश रच रहा है। इनको स्थानीय लोगों की कभी चिंता नहीं रही। हमने तो निजी क्षेत्रों में भी 75 फीसदी स्थानीय लोगों को रोजगार देने का कानून लागू किया। मुख्यमंत्री बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड स्थित बिनोद बिहारी महतो स्टेडियम में शिलान्यास/उद्घाटन व परिसंपत्ति वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे।

17 योजनाओं का उद्घाटन और 53 का शिलान्यास
मौके पर सीएम ने जिले की 17 योजनाओं का उद्धाटन व 53 का शिलान्यास किया। साथ ही 5636.94 लाख की परिसंपत्ति का वितरण किया। विशेष रूप से नावाडीह में 26 करोड़ से मॉडल डिग्री कॉलेज का शिलान्यास दिवंगत शिक्षा मत्री जगरनाथ महतो के नाम से करने एवं गोमिया में डिग्री कॉलेज का उद्घाटन किया।

Hemant Soren,
पिछले 20 सालों में कीचड़ में धंस गया झारखंड!
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 20 सालों में खुराफातों ने ऐसा हाल किया कि झारखंड विकास में पिछड़ा ही नहीं मानो कीचड़ में फंस गया था। पहले यहां लोग जीने तक के लिए जद्दोजहद करते थे। परंतु जब से हमारी सरकार आई, जनता की आवश्यकता अनुरूप काम हो रहा है। 2019 से पहले क्या स्थिति थी किसी से छिपी नहीं है। राशन कार्ड हाथ में रहने के बावजूद लोग भूखे मरने को विवश थे। केंद्र जो कानून बनाता था, उसमें कुछ लोग ही आ पाते थे। तब हमने इतिहास बनाकर सर्वजन पेंशन व विधवा पेंशन योजना शुरू की। जब हमारी सरकार का गठन हुआ, तब कोरोना आ गया बावजूद हमने स्थिति को पुन पटरी पर लाने का काम किया। हालांकि कोरोना में ही जनता की सेवा करते मंत्री हाजी हुसैन अंसारी व बाद में जगरनाथ महतो शहीद हो गए।

हाईकोर्ट ने रद्द कर दी थी पुरानी नियोजन नीति
आपको बता दें कि दिसंबर 2022 में झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार द्वारा फरवरी 2020 में लाई गई नियोजन नीति को रद्द कर दिया था। उस नियोजन नीति में तृतीय एवं चतुर्थवर्गीय पदों पर नियुक्ति के लिए झारखंड से ही 10वीं-12वीं की परीक्षा पास करने की अनिवार्यता को झारखंड हाईकोर्ट ने संविधान विरुद्ध बताया था। सरकार नई नियोजन नीति लाई जिसमें झारखंड से ही मैट्रिक और इंटर की परीक्षा पास करने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई। वहीं, सरकारी नौकरियों में 60 फीसदी सीटें स्थानीय के लिए आरक्षित जबकि 40 फीसदी को ओपन फॉर ऑल रखा गया।

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