ओडिशा: भुवनेश्वर में बदल रहे शहर की स्वच्छता के मायने, जानिए क्या है 'मो खाता'

भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) इस खाद की समय-समय पर टेस्टिंग कर रहा है और इसकी गुणवत्ता को बनाए हुए है। इसी का नतीजा है कि उत्पादन के बाद से भौतिक और रासायनिक दोनों घटक संतोषजनक रहे हैं।

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भुवनेश्वर में एक समुदाय द्वारा संचालित हो रही शहर की स्वच्छता अब गुणवत्तापूर्ण बाई-प्रोडक्ट 'मो खाता' (शहरी खाद) में बदल रही है। साथ ही इस शहरी खाद की बिक्री में इजाफा होने से शहर की स्वच्छता को एक बेहतरीन स्थिति में ले जाने में भी मदद मिल रही है। केंद्रों की यूनिट के मुताबिक निगरानी, सख्त मार्गदर्शन और सहायक पर्यवेक्षण, निरंतर सामुदायिक भागीदारी और उत्पाद की समय-समय पर टेस्टिंग से शहरी खाद की क्वालिटी को बनाए रखना भी आसान हो गया है।

भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) इस खाद की समय-समय पर टेस्टिंग कर रहा है और इसकी गुणवत्ता को बनाए हुए है। इसी का नतीजा है कि उत्पादन के बाद से भौतिक और रासायनिक दोनों घटक संतोषजनक रहे हैं। इसके महत्वपूर्ण घटक जैसे नमी की मात्रा, कण का आकार, पोषक तत्व की मात्रा, कार्बन नाइट्रोजन अनुपात, फास्फोरस और पोटाश जैसी सामग्री आवश्यक गुणवत्ता स्तर पर पाए गए हैं।

राज्य के मुख्य सचिव सुरेश चंद्र महापात्रा और एच एंड यूडी विभाग के प्रमुख सचिव जी. मथी वथानन की उपस्थिति में हुए उद्घाटन के बाद मो खाता (शहरी खाद) ने राजमहल में बने एक कियोस्क में 8 जनवरी 2021 से अपनी बिक्री शुरू की। दो साल की अपनी यात्रा में इस उत्पाद की पहुंच तटीय ओडिशा तक है। इस बीच कटक, ढेंकानाल, खोरधा, नयागढ़ और जाजपुर जैसे जिलों में भी इसकी डिलीवरी हो चुकी है।

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