ओडिशा: 'प्रॉक्सी सरपंच पर अंकुश लगाएं नवीन पटनायक सरकार', उड़ीसा हाईकोर्ट ने दिए निर्देश
उड़ीसा उच्च न्यायालय ने बुधवार को ओडिशा सरकार से राज्य में छद्म सरपंचों की समस्या पर अंकुश लगाने को कहा है। न्यायमूर्ति एसके पाणिग्रही की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा कि पंचायती राज विभाग राज्य में पंचायती राज प्रणाली में महिलाओं के आरक्षण की पवित्रता की रक्षा करने के लिए बाध्य है।
प्रॉक्सी सरपंच ग्राम पंचायतों का प्रबंधन कर रहे हैं, खासकर जहां महिलाएं सरपंच हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि सरकार को उचित विभाग के माध्यम से ऐसे मामले से गंभीरता से निपटना होगा। अन्यथा लोकतंत्र की जमीनी जड़ें खतरे में पड़ जाएंगी।

अदालत ने छपरिया ग्राम पंचायत के तुरेछड़ा गांव के गांव साथी मनोज कुमार मंगराज द्वारा दायर याचिका पर विचार करते हुए यह निर्देश जारी किया। मंगराज ने आरोप लगाया था कि सरपंच के पति ने उसे गांव साथी के रूप में अपना कर्तव्य निभाने से मना कर दिया था, क्योंकि उसने मनरेगा के तहत 30 जॉब कार्ड धारकों की उपस्थिति दिखाने से इनकार कर दिया था। जबकि उन्होंने अपना कर्तव्य नहीं निभाया था।
न्यायमूर्ति पाणिग्रही ने कहा कि सरकार द्वारा प्रायोजित कई योजनाएं हैं जो पंचायती राज संस्थानों के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही हैं। जिनमें गांव साथियों की नियुक्ति और पंचायत स्तर पर उनके काम की निगरानी शामिल है। वर्तमान मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि सरपंच का पति गांव साथी की नियुक्ति और समाप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जबकि उसकी पत्नी जो निर्वाचित सरपंच हैं, उनके पास वास्तविक राजनीतिक और निर्णय लेने की शक्ति है।
न्यायाधीश ने आगे कहा कि पंचायती राज विभाग के सचिव को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है कि संबंधित विभाग ने ऐसे प्रॉक्सी सरपंचों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है और महिला सरपंचों को मौका देने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
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