ओडिशा सरकार जंबो कॉरिडोर का कराएगी सर्वे, मानव-हाथी संघर्ष मौतों में आएगी कमी
कथित तौर पर यह पाया गया था कि 14 पहचाने गए हाथी कॉरिडोर में से कम से कम 10 गैर-कार्यात्मक थे। इस कदम से मानव-हाथी संघर्ष से होने वाली मौतों में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
ओडिशा सरकार हाथियों के जंबो कॉरिडोर का नए सिरे से सर्वेक्षण कराएगी। जिससे मनुष्यों द्वारा परेशान किए बिना उनके प्रमुख आवासों के बीच हाथी की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। पीसीसीएफ (वन्यजीव) एसके पोपली ने कहा कि वन विभाग ने इस संबंध में 'प्रोजेक्ट एलीफेंट' से समर्थन मांगा है।
उन्होंने कहा कि पिछले महीने एमओईएफसीसी की एक बैठक के दौरान सिफारिश की गई थी कि प्रोजेक्ट एलीफेंट सभी हाथी-क्षेत्र वाले राज्यों में यह तय किया जाए कि किसी विशेष क्षेत्र को कॉरिडोर के रूप में कैसे लिया जाए? यह सिफारिश वन विभाग के 2017 के आकलन पर आधारित थी, जिसमें कथित तौर पर यह पाया गया था कि 14 पहचाने गए हाथी कॉरिडोर में से कम से कम 10 गैर-कार्यात्मक थे।

पोपली ने बताया कि हमने ऐसे कॉरिडोर को उचित कानूनी सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए और इस मामले में कैसे आगे बढ़ना चाहिए, इस संबंध में प्रोजेक्ट एलिफेंट से सिफारिशें भी मांगी हैं। सूत्रों ने कहा कि इस मामले पर अगले महीने प्रोजेक्ट एलीफेंट की आगामी संचालन समिति की बैठक के दौरान और विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
'मानव-हाथी संघर्ष मौतों में आएगी कमी'
वन विभाग के वन्यजीव विंग के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि चूंकि मंत्रालय के अधिकारी मुख्य वन्यजीव वार्डन के प्रस्ताव पर सहमत हो गए हैं, इसलिए सर्वेक्षण जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। राज्य में मयूरभंज, महानदी और संबलपुर में तीन हाथी रिजर्व हैं, जो पूर्वी भारत में हाथियों की आबादी का लगभग 72 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि उनके गलियारों की सुरक्षा करना और सुरक्षा प्रदान करना आवश्यक है। उनका मानना है कि इस कदम से मानव-हाथी संघर्ष से होने वाली मौतों में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।












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