अब दिल्ली में बिजनेस करना पहले से ज्यादा होगा आसान, दिल्ली सरकार ने इन चीजों में किया सुधार
अरविंद केजरीवाल सरकार का मकसद राजधानी में दूर दराज से यहां पर कामकाज के लिए आने वाले लोगों को राहत प्रदान करना है,

भारत "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस" की रैंकिंग में लगातार सुधार की दिशा में अग्रसर है. केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार आने वाले समय में इस क्षेत्र में और भी सफलताएं मिलने की संभावना है. संभवत: इस बात को ध्यान में रखते हुए अब दिल्ली सरकार ने भी देश की राजधानी में बिजनेस और सरकार कामकाज की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए करीब 6 दर्जन व्यवस्थाओं और सुधार को मंजूरी दी है.
इसके पीछे अरविंद केजरीवाल सरकार का मकसद राजधानी में दूर दराज से यहां पर कामकाज के लिए आने वाले लोगों को राहत प्रदान करना है. ऐसे लोगों को देश की राजधानी में बिजनेस और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है. दिल्ली में पर्याप्त संसाधन और कनेक्टिविटी है, लेकिन व्यवस्थागत सुधार की गुंजाइश काफी ज्यादा है. दिल्ली इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बिजनेस के दौरान आने वाली अनेक चुनौतियों को कम करना चाहती है. ताकि व्यापारी अपने व्यवसाय को तेज गति से आगे बढ़ा सकें.
दरअसल, दिल्ली सरकार द्वारा राजधानी में व्यवसायिक गतिविधियों को और गति प्रदान करने के उद्देश्य से 16 विभागों के व्यवस्थाओं और सुधार को मंजूरी दी गई है जिसमें सरकार के 70 निर्णय शामिल हैं. जिन विभागों में सुधार पर जोर है, उनमें परिवहन, उत्पाद शुल्क, औषधि नियंत्रण, बिजली, आईटी, राजस्व, श्रम, डीपीसीसी, प्रशासनिक सुधार, अग्निशमन सेवा, स्वास्थ आदि शामिल हैं. इन व्यवस्थाओं में सुधार के माध्यम से व्यापारियों पर बोझ को कम करने के साथ-साथ डिजिटलाइजेशन और ऑनलाइन व्यवस्था को बढ़ावा देना भी शामिल है.
डिजिटलाइजेशन बनेगा ग्रोथ का इंजन
दिल्ली सरकार द्वारा राजधानी में इज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए अब पूरी तरह से कमर कस ली गई है. इसके लिए सबसे ज्यादा डिस्टलाइजेशन और ऑनलाइन व्यवस्था को और भी ज्यादा विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है. ताकि किसी भी प्रमाण पत्र को बनवाने के लिए अनुमति पत्र अथवा दस्तावेज कार्य हेतु प्रशासनिक व अन्य सरकारी दफ्तरों का चक्कर न लगाना पड़े. इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से उनके कागजात संबंधित कार्यों को बेहद आसान बनाने के लिए दिल्ली सरकार प्रयासरत है. यहां पर अहम सवाल यह है कि विभागों में लिए गए इन सुधार संबंधित निर्णयों का व्यवसायिक गतिविधियों में कितना सकारात्मक परिणाम देखने को मिलता है. अगर योजना के अनुरूप सुधारात्मक प्रयासों को बढ़ावा मिला तो इसका लाभ दिल्ली वालों को मिलना तय है.












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