मध्य प्रदेश में प्राकृतिक कृषि बोर्ड का गठन होगा, सीएम शिवराज सिंह चौहान 5 एकड़ भूमि में करेंगे प्राकृतिक खेती
भोपाल। मध्य प्रदेश में प्राकृतिक कृषि बोर्ड का जल्द गठन होगा। इसके लिए सबसे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 5 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती करेंगे। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि पर आयोजित कार्यशाला सिर्फ कर्म-कांड नहीं है, यह कृषि की दशा और दिशा बदलने का महायज्ञ है। प्रदेश में मध्य प्रदेश प्राकृतिक कृषि बोर्ड का तत्काल गठन किया जाएगा। प्राकृतिक खेती की तकनीक की जानकारी देने के लिए प्रदेश के किसानों को पुस्तक उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि मैं स्वयं अपनी 5 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती शुरू कर रहा हूं। उन्होंने प्रदेश के सभी किसानों से अपील की कि उनके पास जितनी भी कृषि भूमि है, उसमें से कुछ क्षेत्र में वे प्राकृतिक खेती प्रारंभ करें। इससे होने वाले लाभ से दूसरे किसान भी प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रेरित होंगे। धरती मां की उर्वरा क्षमता बनाए रखने के लिए हमें सचेत होना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश जैविक खेती में अग्रणी राज्य है।
हमने कीट मित्रों को खत्म कर दिया- चौहान
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रकृति का शोषण नहीं दोहन करने का विचार दिया है। यह भविष्य के खतरे को दृष्टिगत रखते हुए दिया गया मंत्र है। रासायनिक खाद और कीटनाशक के उपयोग के परिणामस्वरूप धरती का स्वास्थ्य निरंतर प्रभावित हो रहा है। आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती मां की उर्वरा क्षमता को बनाए रखने के लिए हमें सचेत रहना होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि यह धरती केवल मनुष्यों के लिए नहीं, अपितु कीट-पतंगों और जीव-जंतुओं के लिए भी है। हमने कीटनाशक के अंधाधुंध उपयोग से कीट मित्रों को समाप्त कर दिया है और हमारी नदियां भी प्रभावित हुई हैं।
रासायनिक खाद के दुष्परिणाम आ रहे सामने-सीएम
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की संकल्पना के अनुरूप जल-संरक्षण के लिए प्रदेश में जलाभिषेक अभियान शुरू किया गया है। हम जितना जल धरती से ले रहे हैं, उस अनुपात में हमें धरती मां को जल देना भी होगा। यह आने वाली पीढ़ी को बेहतर धरोहर सौंपने का प्रयास है। धरती के स्वास्थ्य, कृषकों की स्थिति और निरोगी जीवन के लिए प्राकृतिक खेती ही वैकल्पिक मार्ग है।
उन्होंने कहा कि यह वास्तविकता है कि उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक खाद की आवश्यकता थी। उत्पादन बढ़ाना जरूरी था। परंतु समय के साथ इसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। रासायनिक खाद एवं कीटनाशक के अधिक उपयोग और खेती में पानी की अधिक आवश्यकता आदि से खेती की लागत बढ़ती जा रही है. उत्पादन तो बढ़ रहा है, लेकिन खर्च भी निरंतर बढ़ता जा रहा है। खेती के इस दुष्चक्र का वैकल्पिक मार्ग खोजना होगा।












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