बच्चों की Gender Change Surgery पर केरल हाईकोर्ट सख्त, कहा- ये सर्जरी अधिकारों का है हनन
एक दंपति ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर थी। जिसमें कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका खारिज कर दी और सख्त टिप्पणी की।
केरल हाईकोर्ट ने बच्चों के लिंग परिवर्तन के लिए कराई जाने वाली सर्चरी (Gender Change Surgery) को अधिकारों का हनन करने वाला बताया गया है। अदालत ने कहा कि बच्चों पर लिंग परिवर्तन सर्जरी संविधान में निहित अधिकारों का आक्रमण है। सरकार को ऐसी सर्जरी करने के अनुरोधों की जांच करने के लिए विशेषज्ञों की एक राज्य-स्तरीय बहु-विषयक समिति गठित करने का निर्देश दिया है।

एक दंपति की ओर दायर की गई याचिका पर केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को सुनावाई की। इस दौरान अदालत से चार साल की बच्ची की लिंग परिवर्तन सर्जरी कराने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बच्चों पर लिंग परिवर्तन सर्जरी संविधान द्वारा परिकल्पित अधिकारों का आक्रमण है। बिना सहमति के ऐसी सर्जरी बच्चों की गरिमा और निजता का उल्लंघन है।
अदालतने अपने नोट में कहा, "सरकार को ऐसी सर्जरी को विनियमित करने के लिए एक कानून लाना चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया कि सर्जरी की अनुमति केवल तभी दी जानी चाहिए जब बच्चे की जान को खतरा हो। आगे कहा कि इससे बच्चों के बड़े होने पर भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। याचिका सुनवाई करते हुए कहा कि अगर बच्चे की जान को खतरा हो तभी सर्जरी की इजाजत दी जा सकती है। अदालत ने समिति को याचिकाकर्ताओं के आवेदन पर दो महीने के भीतर निर्णय लेने का भी निर्देश दिया है।
याचिका सुनवाई के दौरान जस्टिस वीजी अरुण ने सुझाव दिया कि सरकार को बच्चों में लिंग परिवर्तन सर्जरी को विनियमित करने के लिए तीन महीने के भीतर एक कानून लाना चाहिए। अदालत ने कहा कि समिति में एक मनोवैज्ञानिक और एक बाल रोग विशेषज्ञ को शामिल किया जाना चाहिए।












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