सीएम ने किया वीर गुण्डाधुर की प्रतिमा का वर्चुअल लोकार्पण
कांकेर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने निवास कार्यालय से नगर पालिका कांकेर के घड़ी चौक में स्थापित वीर गुण्डाधुर की प्रतिमा का वर्चुअल लोकार्पण किया। छत्तीसगढ़ विधानसभा के उपाध्यक्ष मनोज मण्डावी भी रायपुर से लोकार्पण कार्यक्रम में जुडे हुए थे। वीर गुण्डाधुर की प्रतिमा के लोकार्पण अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए प्रदेश के भूपेश बघेल ने कहा कि वीर गुण्डाधुर ने बस्तर के जल, जंगल, जमीन और आदिवासियों की संस्कृति व स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी।

कांकेर जिले के परलकोट के जमींदार शहीद गैंदसिंह को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के पहले ही उन्होंने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी थी। बस्तर के वीर सपूतों ने अपनी आजादी को किसी के पास गिरवी रखने नहीं दिया, उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि बस्तर व आदिवासियों के विकास के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। मिलेट मिशन संचालित किया जा रहा है, कोदो, कुटकी, रागी व लघु वनोपज को समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है।
हाट बाजारों में हाट-बाजार क्लिीनिक योजना अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग द्वारा शिविर लगाकर मरीजों का उपचार किया जा रहा है, जिससे मलेरिया उन्मूलन में मदद मिली है। आंगनबाड़ी केंद्रों में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराए गए है, जिससे कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में सफलता मिल रही है। स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल से बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान किया जा रहा है। इस प्रकार सरकार द्वारा आदिवासियों को आर्थिक, शैक्षणिक एवं शरीरिक रूप से मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि कांकेर के विकास में किसी प्रकार की कमी आने नहीं दी जाएगी।
गर्व महसूस करते हैं: मंडावी
मनोज मंडावी ने कहा कि वीर गुण्डाधुर भूमकाल विद्रोह 1910 की क्रांति के महानायक थे। बस्तर की माटी के लिए न्यौछावर होने वाले इस वीर सपूत का स्मरण कर हम गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने बस्तर की संस्कृति व स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व त्याग किया, जब तक हम अपने पूर्वजों के योगदान को याद नहीं करेंगे तब तक आगे नहीं बढ़ सकते। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व छत्तीसगढ़ के बहुमुखी विकास के लिए किए जा रहे कार्यो की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि चाहे लोहंडीगुडा के आदिवासियों के जमीन वापसी अथवा वन अधिकार मान्यता पत्रों का वितरण, बस्तर के विकास को हमेशा सामने रखा गया। प्रदेश सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं परंपरा को सजोए रखने के लिए भी बेहतर प्रयास किए गए हैं तथा विकास कार्यो को गति प्रदान की जा रही है।
क्षेत्रवासियों की थी मांग
संसदीय सचिव व कांकेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शिशुपाल शोरी ने इसे एतिहासिक बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र की जनता चाहती थी कि बस्तर के प्रवेश द्वार में वीर गुण्डाधुर का प्रतिमा हो। क्षेत्रवासियों की मांग को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने 28 जनवरी 2021 को ग्राम गोविंदपुर के कार्यक्रम में वीर गुण्डाधुर की प्रतिमा कांकेर शहर में लगाने की घोषणा की थी, जो आज पूरा हो गया है। इससे क्षेत्र की जनता हर्षित है। शोरी ने कहा कि वीर गुण्डाधुर भूमकाल क्रांति 1910 के महानायक थे, उन्होंने सीमित संसाधन के बावजूद उस समय के विश्व की सबसे बड़ी ताकत अंग्रेजो को चुनौति दी थी। आज उनके प्रतिमा का कांकेर शहर में अनावरण हो रहा है, जिससे पूरा समाज प्रफुल्लित है। उनकी प्रतिमा हमें यह अहसास कराएगा कि यह वीरों की भूमि है।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम को जिला पंचायत के अध्यक्ष हेमंत ध्रुव, बस्तर विकास प्राधिकरण के सदस्य बिरेश ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य हेमलाल मरकाम एवं नरोत्तम पडोटी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर गोसेवा आयोग के सदस्य नरेंद्र यादव, पर्यटन मण्डल के सदस्य नरेश ठाकुर, नपा कांकेर अध्यक्ष सरोज जितेंद्र ठाकुर, उपाध्यक्ष मकबूल खान, पूर्व विधायक शंकर ध्रुवा, जिपं के पूर्व अध्यक्ष सुभद्रा सलाम, उपाध्यक्ष हेमनारायण गजबल्ला, कलेक्टर चन्दन कुमार, पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा, जपं कांकेर अध्यक्ष रामचरण कोर्राम, उपाध्यक्ष रोमनाथ जैन, सदस्य राजेश भास्कर, गोड़वाना समाज के संरक्षक आनंद गावड़े, रामप्यारे कावड़े, सुखदेव शोरी, पार्षद शैलेंद्र शोरी, दीपक शोरी, आनंद चैरसिया, जितेन्द्र वैद्य, सादाब खान, अजय रेणु सिंह, विजय लक्ष्मी कौशिक, गीता गोपाल शर्मा, लीना मनोज जैन, राजकिशोर ठाकुर, सोमेश सोनी, उगेश्वरी उईके, माला तिवारी, गायत्री शर्मा, यासिन करानी, सुनील गोस्वामी सहित पार्षदगण एवं गणमान्य नागरिक मौजूद थे।












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