Jharkhand: 17 साल बाद आदिवासियों को मिलेगा वन पट्टा, CM सोरेन ने की अभियान की शुरुआत
Jharkhand: झारखंड सरकार ने सोमवार को अबुआ बीर अबुआ दिशोम अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के तहत आदिवासियों को वन पट्टा दिया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत जो कार्य बहुत पहले होने चाहिए थे, कहीं न कहीं उस काम की शुरुआत आज उनकी सरकार अबुआ बीर अबुआ दिशोम अभियान के रूप में कर रही है।
वन अधिकार अधिनियम के लागू हुए लगभग 17 से 18 वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन झारखंड में इस अधिनियम की गंभीरता को नजरअंदाज किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई चुनौतियों के बाद आज उनकी सरकार वन अधिकार अधिनियम को एक मुहिम के तौर पर शुरू कर रही है।

इस मुहिम के तहत राज्य के वन क्षेत्रों में निवास करने वाले आदिवासी और मूलवासी समुदायों के बीच बड़ी संख्या में वनपट्टा का वितरण करने का लक्ष्य रखा गया है। सीएम ने इस अधिनियम के तहत आदिवासियों को वनाधिकार पट्टा देने में अबतक हुई लापरवाही पर नाराजगी भी व्यक्त की। उन्होंने सामान्य लहजे में ही सामूहिक रूप से अधिकारियों को इसके लिए खरी-खोटी भी सुनाई।
आदिवासी पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाते एसटी, एससी, अल्पसंख्यक व पिछड़ा वर्ग की ओर से शुरू इस अभियान के दौरान मुख्यमंत्री ने दिल्ली के भीषण प्रदूषण की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि कई जगह मंदिरों या अन्य तरह के निर्माण में पेड़ नहीं तो कम से कम झाड़ियों को नष्ट किया ही जाता है। लेकिन आदिवासी समाज कभी पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाते, क्योंकि उन्हें पता है कि यही पेड़ उनका जीवन हैं।
सीएम ने कहा कि उनकी सरकार की वनपट्टा वितरण पर विशेष फोकस है। इस अभियान की समय-समय पर समीक्षा भी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ उपायुक्तों ने उनसे एक-दो डिसमिल का वनपट्टा बंटवाकर बेवकूफ बनाया।
ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। वनों की अवैध कटाई पर कहा कि यहां लकड़ी चोर नहीं, लकड़ी डकैत हैं। आदिवासियों अमें जागरुकता की कमी नहीं है। कमी है तो सिस्टम के अंदर कार्य करने वाले लोगों की इच्छा शक्ति में।
वनाधिकार पट्टा देने में हुई लापरवाही पर नाराजगी
मुख्यमंत्री ने आईएएस व आईएफएस अफसरों से कहा कि वह दूसरों राज्यों को देखें, जहां आदिवासियों की संख्या कम है, लेकिन वहां पर अधिकार के तहत वनपट्टों का वितरण हुआ है।
उन राज्यों में भी यहां की तरह ही अधिकारी हैं, लेकिन काम करने में यह अंतर क्यों आता है। यह समझ से परे है। ऐसा नहीं कि यहां के अधिकारियों में क्षमता नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर आवेदनों का निष्पादन करने लगेंगे, तो कितने अधिकारी नपेंगे यह पता नहीं।
वृक्ष नहीं तो डीसी को बंगला नहीं
सीएम ने कहा कि उपायुक्तों को बंगला मिलता है। बंगले के परिसर में फूल लगाते हैं, लेकिन जामुन, करंज, आम, नीम जैसे वृक्ष नहीं लगाते। पेड़ नहीं लगाया तो बंगले की जगह अपार्टमेंट में रहें। सभी अधिकारी वृक्षारोपण पर ध्यान दें।
खनन कंपनियां कबाड़ करके छोड़ेंगी
सीएम ने कहा कि खनन कंपनियां खनिज संपदा निकालकर राज्य को ऐसी कबाड़ की स्थिति में छोड़ेंगी, जिसकी व्याख्या करना मुश्किल है। आने वाले दिनों में झारखंड की भौगोलिक स्थिति व विकास की गतिविधियों में टकराव की नौबत बनेगी।












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