सीएम केसीआर की नीतियों का असर, तेलंगाना में घटी गरीबों की संख्या
गरीबी के खिलाफ लड़ाई में तेलंगाना को बड़ी सफलता मिली है। नीति आयोग की तरफ से सोमवार को दिल्ली में जारी 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक: एक प्रगति समीक्षा 2023' के मुताबिक, तेलंगाना ने उम्मीद से बढ़कर अच्छा प्रदर्शन किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2015-16 की तुलना में साल 2019-21 में तेलंगाना में गरीबों का प्रतिशत घटा है। रिपोर्ट बताती है कि राज्य में बहुआयामी गरीबों का प्रतिशत 2015-16 में 13.18 फीसदी था, जो 2019-21 में घटकर 5.88 फीसदी रह गया है।

इसी तरह गरीबी का प्रतिशत भी अब 4.21 फीसदी से घटकर 2.52 फीसदी हो गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आसिफाबाद जैसे जिलों में भी गरीबों का प्रतिशत कम हुआ है। हालांकि गरीबों का प्रतिशत आसिफाबाद (16.59 फीसदी) और जोगुलम्बा गडवाल (15.37 फीसदी) में सबसे ज्यादा है। वारंगल तथा अन्य शहरी क्षेत्रों में गरीबों का प्रतिशत कम है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर भारत में बहुआयामी गरीबों की संख्या में 9.89 प्रतिशत अंकों की एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई। 2015-16 में ये आंकड़ा 24.85 फीसदी था, जो अब घटकर 2019-2021 में 14.96 फीसदी रह गया है।
'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक: एक प्रगति समीक्षा 2023' की रिपोर्ट बताती है कि इस अवधि के दौरान लगभग 13.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए, जिसका मूल्यांकन संयुक्त राष्ट्र से अप्रूव्ड मापदंडों का उपयोग करके "स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में गंभीर अभाव" की पहचान करके किया गया।












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