हरियाणा: 17 जिलों में कपास की पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही सरकार, लें फायदा
झज्जर: हरियाणा की हरी-भरी धरती अब सफेद सोना भी उगलने वाली है। गेहूं व अन्य फसलों की पैदावार के साथ-साथ प्रदेश कपास की पैदावार में भी अपनी अलग पहचान बनाएगा। जहां प्रदेश कपास की पैदावार को कमजोर होता देख सरकार ने इसको बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ताकि जहां प्रदेश में कपास की बिजाई एरिया घट रहा है, उसे किसी प्रकार से बढ़ाया जाए। साथ ही किसानों की लागत को भी कम करने व बरानी एरिया में सिंचाई की मुख्य समस्या को दूर करने का भी प्रयत्न है। इसी उद्देश्य से सरकार प्रदेश के 17 जिलों में कपास का एरिया बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान कपास का बिजाई एरिया कम हुआ है। जिसका सीधा असर पैदावार पर भी पड़ा। किसान कपास की बिजाई करने से दूरी बनाते नजर आते हैं, इसका एक कारण कपास की खेती में मेहनत का अधिक होना तथा दूसरा कारण सिंचाई के लिए उपयुक्त संसाधनों की कमी होना भी माना जाता है। साथ ही खर्च भी काफी होता है। इसको देखते हुए किसान कपास की खेती कम करने लगे। जिस कारण सरकार ने किसानों को ड्रिप सिस्टम से सिंचाई करने व सिंचाई के लिए खेत में टैंक बनवाने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया।
जिसके तहत सरकार खेत में टैंक बनवाने व ड्रिप सिस्टम लगवाने के लिए अनुदान भी देगी। टैंक बनवाने के लिए किसानों को सब्सिडी देने का उद्देश्य है कि इसके बाद किसान खेत में कपास की बिजाई करें। इसके लिए जिला हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, भिवानी, चरखी दादरी, रोहतक, झज्जर, सोनीपत, जींद, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, पानीपत, फरीदाबाद, मेवात, गुरुग्राम, पलवल व कैथल का चयन हुआ है। जहां के किसानों को पानी के भंडारण के लिए टैंक बनाने पर अनुदान दिया जाएगा।
सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली अपनाने से किसान को ना केवल पानी की बचत होगी, साथ ही अन्य खर्च में कमी आएगी और पैदावार बढ़ेगी। सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी अशोक चाहर ने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली में सामान्य सिंचाई के मुकाबले मात्र 20 फीसद पानी की ही आवश्यकता होती है। वहीं कपास में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली का प्रयोग किया जाता है तो पानी भी केवल पौधे के पास ही रहेगी, जिससे अन्य खेत में खरपतवार काफी कम पैदा होगी। वहीं सिंचाई के जरिए खाद भी डाली जा सकती है। जिससे खर्च भी कम होगा। वहीं पैदावार भी दो गुना तक बढ़ेगी।
किसानों को सवा दो लाख से 3.34 लाख रुपये तक टैंक बनाने के लिए सब्सिडी दी जाएगी। अगर किसान 60 गुना 36 गुना 10 फीट का टैंक बनवाता है तो उसकी 3 लाख 50 हजार लीटर पानी की क्षमता होगी और किसान को 2 लाख 25 हजार रुपये सब्सिडी दी जाएगी। इस टैंक से किसान एक हेक्टेयर (ढाई एकड़) में सिंचाई की जा सकती है। वहीं यदि किसान 65 गुना 55 गुना 10 फीट का टैंक बनाता है तो उसमें 7 लाख लीटर पानी आएगा। इसके लिए किसान को 3 लाख 34 हजार रुपये सब्सिडी दी जाएगी। इस टैंक से दो हेक्टेयर (पांच एकड़) में सिंचाई हो सकती है।
झज्जर जिले की बात करें तो पिछले कुछ वर्षों में कपास का बिजाई एरिया बढ़ा है। इसके बाद भी जिले के 10 किसानों ने इस स्कीम से जुड़ते हुए टैंक बनवाने के लिए आवेदन किया है। वर्ष 2019 में जिले के कुल 8270 हेक्टेयर में कपास की बिजाई हुई थी। वहीं वर्ष 2020 में 11 हजार 500 हेक्टेयर तथा वर्ष 2021 में 12 हजार 975 हेक्टेयर में कपास की बिजाई की गई। इस एरिया को बढ़ाने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है।
"कपास का एरिया बढ़ाने के लिए प्रदेश के 17 जिलों में किसानों को वाटर टैंक बनवाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिले के 10 किसानों ने इसके लिए आवेदन किया है। सरकार इसके लिए अनुदान भी देगी। इसका उद्देश्य कपास का बिजाई एरिया बढ़ाना है।"
- अशोक चाहर, सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी, झज्जर
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