हरियाणा: परिवार पहचान पत्र बना जनसेवा का प्रभावी ज़रिया

बुधवार को जी-20 की पहली एंटी करप्शन वर्किंग ग्रुप के साइड इवेंट में 'डीबीटी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ' विषय पर चर्चा का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी. उमाशंकर ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए हरियाणा सरकार की विशेष तौर पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल की दूरदर्शी सोच से अवगत कराते हुए बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पात्र लाभार्थियों तक सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे तौर पर सरलता से पहुंच रहा है। इसके लिए उन्हें आवेदन करने की भी ज़रूरत नहीं है।
प्रधान सचिव वी.उमाशंकर ने तकनीक के ज़रिए आम लोगों तक सीधे लाभ पहुँचाने पर प्रदेश के अनुभव सांझा किये और बताया कि परिवार पहचान पत्र के माध्यम से अब लोगों को निर्धारित समय पर ही योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के लाभार्थी तक योजनाएं पहुंचाना अब संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि हरियाणा प्रदेश में मुख्यमंत्री मनोहर लाल की दूरदर्शी सोच के चलते पात्र लाभार्थियों तक योजनाएं सीधे पहुंच रही हैं।
परिवार पहचान पत्र के तहत परिवार को सरकार ने एक यूनिट माना है, जिसमें परिवार के हर सदस्य की शैक्षणिक योग्यता, आय, आयु आदि का पूरा ब्यौरा होता है। परिवार के आधार पर लाभार्थी योजनाओं की पात्रता सुनिश्चित करना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि सरकार ने कई पोर्टल और अलग-अलग आंकड़ों को एक पोर्टल पर लाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि अब एक-एक डाटा को वेरीफाई करने का काम सरकार कर रही है तथा सही समय पर सही व्यक्ति तक सरकारी योजना का लाभ देने के लिए सरकार कृत संकल्प है।
वी.उमाशंकर ने कहा कि योजनाओं का लाभ लेने के लिए इनकम मापना सबसे बड़ा काम है। अब बिना आवेदन किए लोगों को ऑटोमेटिक तरीके से सुविधाएं मुहैया हो रही हैं। उन्होंने बताया कि पीपीपी के तहत 30 लाख के करीब परिवारों को चिरायु हरियाणा जैसी योजनाओं का लाभ देते हुए स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया है।












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