हरियाणा: दुष्यंत चौटाला बोले, यमुना की गाद पर हक के लिए किसानों की खातिर बनेगी पॉलिसी
हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि यमुना नदी में बाढ़ या ज्यादा बारिश के दौरान पानी का बहाव तेज होने के कारण यमुना के साथ लगते यमुनानगर, करनाल पानीपत, सोनीपत तथा पलवल, फरीदाबाद जिला में यमुना के आस पास के खेतों की जमीन का कटाव हो जाता है जिसके कारण किसानों की फसलों का नुकसान तो होता ही है, साथ में उनके खेतों में भारी मात्रा में गाद जमा हो जाती है।
उन्होंने कहा कि, ऐसे प्रभावित किसानों के हित में राज्य सरकार नई पॉलिसी बनाने जा रही है जिसके तहत किसान के खेत में एकत्रित हुई गाद की नीलामी की जाएगी जिसमे नीलामी से मिलने वाली 10 लाख तक की धनराशि में से एक तिहाई हिस्सा किसान का होगा और दो-तिहाई हिस्सा सरकार के खाते में चला जाएगा। इस पॉलिसी से किसान और सरकार दोनों को फ़ायदा होगा। उन्होंने बताया कि ऐसी पॉलिसी देश में सबसे पहले हरियाणा में बनने जा रही है।

डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने आगे बताया कि बाढ़ से प्रदेश में 475 मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं जिनमे से 108 मकानों का क्लेम प्रभावितों को दे दिया है। इसके अलावा, बाढ़ के दौरान प्रदेश में 47 लोगों की जान गई है, इनमे से 40 मृतकों के परिजनों को एक करोड़ 60 लाख रुपए की सहायता राशि दे दी गई है बाकी मृतकों के मामले में रिपोर्ट मंगवाई गई है, जल्द ही उनके परिवार वालों को भी सहायता राशि भिजवा दी जाएगी।
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि आगे जानकारी दी कि प्रदेश में 1324 सड़कों को करीब 2105 किलोमीटर एरिया में नुकसान हुआ है, इसमें कुल 338 करोड़ रुपए के नुकसान की संभावना है। इसके अलावा 14 पुलों को भी नुकसान पहुंचा है जिनको ठीक करने में 8 करोड़ की लागत आएगी।
उन्होंने जानकारी दी कि बाढ़ के कारण जो सड़कें टूट गई थी और रास्ता बंद हो गया था, उनमें से अधिकतर खोल दी हैं। सड़कों को दुरुस्त करने का काम जल्द से जल्द करवाने के लिए सरकार ने 20 लाख तक लागत के छोटे कार्य एक्सईएन-एसडीओ लेवल की कमेटी और 20 लाख से एक करोड़ तक के कार्य जॉइंट टेंडर करवाए जायेंगे। इनके अलावा एक करोड़ से अधिक लागत वाले सड़कों के कार्यों को पीडब्लूडी विभाग के इंजिनीरिंग पोर्टल के माध्यम से टेंडर आमंत्रित करके करवाए जाएंगे।
डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने यह भी बताया कि इस बार आई बाढ़ में कई स्थानों पर आबादी को डूबने से बचाने के लिए सड़कों को काटना पड़ा है। भविष्य की सुविधा के लिए सरकार ने निर्णय लिया है कि ऐसे कटाव वाले स्थानों पर सड़कों के नीचे पाइप डाले जाएंगे ताकि भविष्य में कभी पानी निकासी की जरुरत पड़े तो सड़कों को काटना नहीं पड़ेगा और यातायात भी बाधित नहीं होगा।












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