सिक्किम के रैयतों और हीराकुंड बांध विस्थापितों की भूमि समस्या दूर करेगी ओडिशा सरकार
राज्य सरकार ने संबलपुर जिले की रेंगाली तहसील में सिक्किम के रैयतों की भूमि और हीराकुंड बांध परियोजना के विस्थापितों के लंबे समय से लंबित मुद्दों को हल करने का फैसला किया। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस प्रस्ताव से कटक, पुरी और बालासोर जिलों के लगभग दो लाख छोटे और सीमांत किसानों को लाभ होगा। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों को मामलों का जल्द से जल्द समाधान शुरू करने का निर्देश दिया।
सिक्किम रैयत समस्या किरायेदारों और उप-किरायेदारों से संबंधित है और दशकों से राज्य के कई जिलों में प्रचलित है। सूत्रों ने कहा कि समस्याओं का समाधान खोजने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सितंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में तीन उच्च स्तरीय बैठकें हुईं।

इससे पहले गंजम जिले के सोरदा ब्लॉक, झारसुगुड़ा में हीराकुंड बांध परियोजना के विस्थापितों और पुरी नगर पालिका में पट्टे पर दी गई भूमि के मुद्दों पर इसी तरह की समस्याओं को हल करने के लिए निर्णय लिए गए थे।
5टी सचिव वीके पांडियन को जिलों के दौरे के दौरान समस्या से संबंधित कई शिकायत याचिकाएं प्राप्त हुई थीं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि संबलपुर जिले के रेंगाली तहसील के कुर्ला, थुनटिकतरबागा, योगीपल्ली और सापने गांवों में समस्या के समाधान के लिए एक उच्च तकनीक सर्वेक्षण का आदेश दिया गया था, जहां हीराकुंड परियोजना से विस्थापित परिवार रहते हैं। जिला प्रशासन को जल्द सर्वे पूरा कर जमीन संबंधी समस्या का समाधान करने को कहा गया है।
दिन के दौरान इस पर एक समीक्षा बैठक में विकास आयुक्त अनु गर्ग, राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सत्यब्रत साहू, कानून विभाग के सचिव मानस रंजन बारिक और गंजम, संबलपुर, पुरी, खुर्दा और झारसुगुड़ा के कलेक्टरों के साथ 5T सचिव उपस्थित थे।
अंतिम समाधान
इस संकल्प से कटक, पुरी और बालासोर जिलों के लगभग दो लाख छोटे और सीमांत किसानों को लाभ होगा।
सीएम के निर्देश पर सितंबर के पहले और दूसरे हफ्ते में तीन उच्च स्तरीय बैठकें हुईं।












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