झारखंड में पहली बार नवजात के लिए अलग एंबुलेंस, जानिए किस तरह की होंगी सुविधाएं
रांची,16 अक्टूबर- झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार का 108 इमरजेंसी रेस्पांस सर्विस में 206 नए एंबुलेंस को शामिल करने का निर्णय सराहनीय है। निश्चित रूप से इसका लाभ गंभीर रूप से बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं के अलावा दुर्घटना
रांची,16 अक्टूबर- झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार का 108 इमरजेंसी रेस्पांस सर्विस में 206 नए एंबुलेंस को शामिल करने का निर्णय सराहनीय है। निश्चित रूप से इसका लाभ गंभीर रूप से बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं के अलावा दुर्घटना में जख्मी होनेवाले लोगों को मिलेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें 24 एंबुलेंस नवजातों के लिए होंगे, जिनमें वार्मर से लेकर नवजातों के वेंटिलेटर और प्रशिक्षित नर्सों की सुविधा बहाल रहेगी। झारखंड में नवजातों के लिए पहली बार अलग से एंबुलेंस संचालित होंगे। हालांकि, अभी प्रत्येक जिला को एक-एक ही ऐसा एंबुलेंस मिल पाएगा। उम्मीद है कि भविष्य में इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी।

जीपीएस सिस्टम व अन्य सुविधाओं से लैस होंगे एंबुलेंस
108 इमरजेंसी रेस्पांस सर्विस के तहत कई अन्य सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, जिनमें एंबुलेंस में जीपीएस सिस्टम लगाने से लेकर अन्य तकनीक विकसित करना शामिल है, ताकि इसका लाभ अधिक से अधिक लोग उठा सकें। यह सही भी है। जरूरत पड़ने पर लोगों को एंबुलेंस समय पर मिल सके तथा मरीजों को जितना जल्द हो सके अस्पताल पहुंचाया जा सके, इसे सुनिश्चित करने की जरूरत है। नवजातों के लिए एंबुलेंस की सुविधा बहाल होने से शिशुओं की मृत्यु दर में और भी कमी आ सकेगी।
शिशु रोग विशेषज्ञ बढ़ाने पर करना होगा अब विचार
कोरोना काल में राज्य सरकार ने अस्पतालों में बच्चों के लिए अलग वार्ड बनाने से लेकर कई अन्य संरचनाएं विकसित की हैं। जरूरत उन सभी संसाधनों का उपयोग में लाना है। यदि अस्पतालों में बच्चों के इलाज के लिए तमाम संसाधन क्रियाशील होंगे तभी एंबुलेंस का भी सही लाभ मिल पाएगा। राज्य सरकार को अस्पतालों में शिशु रोग विशेषज्ञों तथा प्रशिक्षित नर्सों व अन्य पारा मेडिकल कर्मियों की संख्या भी बढ़ाने चाहिए। उम्मीद है कि राज्य सरकार इन सभी बातों पर ध्यान देगी।
घायलों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाने पर मिलेंगे 5 हजार
राज्य सरकार ने दुर्घटना में घायल होनेवाले लोगों को गोल्डन आवर में अस्पताल में पहुंचाने वाले लोगों को प्रोत्साहन के रूप में पांच हजार रुपये देने का भी निर्णय लिया है। यह प्रयास तभी सफल हो पाएगा जब घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए समय पर एंबुलेंस पहुंचाने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध अन्य एंबुलेंस को भी 108 से जोड़ा जा सकता है। खासकर सुदूर क्षेत्रों में लोगों को एंबुलेंस की सुविधा किस प्रकार समय पर मिल सके, इसपर ध्यान देने की जरूरत है।












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