बागी विधायकों के दबाव में नहीं आएंगे डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत
चंडीगढ़, 11 जुलाई। जननायक जनता पार्टी के संरक्षक एवं हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला अपनी पार्टी के बागी विधायकों के दबाव में आने वाले नहीं हैं। गुहला-चीका के विधायक ईश्वर सिंह की सड़कें नहीं बन पाने को लेकर नाराजगी और नरवाना के विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा के भाजपा प्रेम को दुष्यंत चौटाला ने गंभीरता से लिया है। किसी राजनीतिक नफे-नुकसान की चिंता किए बिना दुष्यंत चौटाला न तो अपनी पार्टी के बागी विधायकों का दबाव मानने को तैयार होंगे और न ही उन्हें विद्रोही रुख अपनाने की इजाजत देंगे। दुष्यंत ने भाजपा का पटका गले में पहनने वाले विधायक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत देकर उन विधायकों को भी संदेश दे दिया है, जो सत्ता सुख भोगते हुए भी पार्टी के प्रति वफादार नहीं हैं।

2019 के विधानसभा चुनाव में जनननायक जनता पार्टी के 10 विधायक चुनकर आये थे। उनमें स्वयं दुष्यंत चौटाला उचाना से और उनकी माता नैना चौटाला बाढ़सा से चुनाव जीते थे। बाकी आठ विधायकों में आधा दर्जन ऐसे हैं, जो दूसरे दलों के बागी हैं। यानी जिन नेताओं को कांग्रेस, इनेलो अथवा भाजपा ने अपनी पार्टियों से टिकट नहीं दिये, वह दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी में आए। तब दुष्यंत चौटाला ने उन्हें टिकट देकर चुनाव लड़वाया और वह जीत भी गये। इसमें न केवल दुष्यंत चौटाला का फायदा हुआ, बल्कि उन विधायकों को भी राजनीतिक लाभ मिला, जिन्हें दूसरे दलों ने नकारा घोषित करते हुए अपनी पार्टियों के दरवाजे बंद कर लिये थे। अब यही विधायक दुष्यंत चौटाला को आंखें दिखा रहे हैं।
नारनौंद के विधायक रामकुमार गौतम भले ही बार-बार यह कहते रहें कि उन्होंने जजपा के बाकी विधायकों को चुनाव जिताने में सहयोग किया है, लेकिन यह भी सच्चाई है कि पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के हलके में अगर गौतम चुनाव जीत गये तो यह दुष्यंत चौटाला का ही दम है। टोहाना में देवेंद्र बबली का खुद का वोट बैंक है, लेकिन भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला के इस हलके में बबली की जीत दुष्यंत चौटाला की रणनीति का ही हिस्सा कही जा सकती है। गुहला चीका के विधायक ईश्वर सिंह को कांग्रेस पूरी तरह से नकार चुकी थी। उन्हें न तो सैलजा ने गले लगाया और न ही हुड्डा ने भाव दिया।
बरवाला के विधायक जोगी राम सिहाग और नरवाना के विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा की जीत भी उनकी स्वयं की जीत नहीं कही जा सकती, लेकिन अब यही विधायक दुष्यंत की नाक में दम करने में लगे हुए हैं। रामकुमार गौतम के अक्सर कड़वे बोल को दुष्यंत चौटाला हर बार उन्हें अपना बुजुर्ग कहकर नजरअंदाज करते रहे हैं, लेकिन ईश्वर सिंह ने जिस तरह अपने हलके में तीन सड़कें नहीं बनने पर पार्टी के कार्यक्रमों में नहीं जाने का ऐलान किया है, उससे दुष्यंत चौटाला खासे नाराज हैं। दुष्यंत ने आंकड़ों के साथ जवाब दिया कि जजपा विधायकों में सबसे अधिक सड़कें ईश्वर सिंह के हलके में बनी हैं। इसके अलावा वह जिन तीन सड़कों के निर्माण की मांग कर रहे हैं, उनकी टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। अगर कोई यह चाहे कि मैं टेंडर खुद ही निकाल दूं तो यह संभव नहीं है। यानी दुष्यंत ने ईश्वर सिंह को स्पष्ट संकेत दे दिया है कि यदि उन्होंने अपने बगावती सुर जारी रखे तो कार्रवाई झेलने के लिये तैयार रहना चाहिये।
इसी तरह, नरवाना के विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा के भाजपा प्रेम पर दुष्यंत चौटाला काफी नाराज हैं। रामनिवास ने शहरी निकाय चुनाव के नतीजों के बाद कुछ लोगों को भाजपा में शामिल कराया है। विधायक नरवाना की चेयरमैन मुकेश मिरधा व उनके पति को मिलवाने के लिये मुख्यमंत्री के पास लेकर गये थे। तब मुख्यमंत्री मनोहर लाल के हाथों सुरजाखेड़ा ने भाजपा का पटका भी पहना था। इस पर दुष्यंत चौटाला ने स्पष्ट रूप से कार्रवाई के संकेत दिये हैं। दुष्यंत चौटाला ने साफतौर पर कहा है कि पार्टी इस मामले में बेहद गंभीर है और वह किसी तरह की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं करेगी। ईश्वर सिंह, गौतम व सुरजाखेड़ा के प्रति दुष्यंत चौटाला के कड़े रुख का मतलब साफ है कि यदि वह पार्टी लाइन से नीचे उतरे तो फिर उन्हें कार्रवाई के लिए भी तैयार रहना चाहिए। यह अलग बात है कि भाजपा व कांग्रेस में इन पुराने बागियों के रास्ते पूरी तरह से खुले हुए हैं।












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