बसों की 24 घंटे लाइव निगरानी करेगी दिल्ली सरकार
राजधानी की बसों में यात्रियों का सफर और सुगम और सुरक्षित होने वाला है। दिल्ली सरकार डीटीसी और क्लस्टर में चलने वाली बसों के परिचालन को लेकर 24 घंटे लाइव निगरानी करेगी। दिल्ली परिवहन विभाग ने बसों की लाइव निगरानी के लिए क
दिल्ली, 17 अक्टूबरः राजधानी की बसों में यात्रियों का सफर और सुगम और सुरक्षित होने वाला है। दिल्ली सरकार डीटीसी और क्लस्टर में चलने वाली बसों के परिचालन को लेकर 24 घंटे लाइव निगरानी करेगी। दिल्ली परिवहन विभाग ने बसों की लाइव निगरानी के लिए कश्मीरी गेट बस अड्डे पर कमांड कंट्रोल निगरानी केंद्र तैयार कर लिया है। बसों की निगरानी वाले कंट्रोल रूम का ट्रायल पूरा हो चुका है।

सूत्रों की माने तो इस सप्ताह परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत इसकी आधिकारिक तौर पर शुरूआत करेंगे। कमांड कंट्रोल निगरानी केंद्र से बसों में लगे जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) के जरिए बसों के पल-पल की खबर मिलेगी। अगर बस अपने स्टॉप पर नहीं रूकती है तो उसका अलर्ट नियंत्रण कक्ष को जाएगा। वहां बैठा व्यक्ति चाहे तो सीधे बस परिचालक को फोन करके इसका कारण भी पूछ सकता है।
अगर किसी रूट नंबर की बस अपने तय रूट से अलग किसी रास्ते जा रही है तो उसकी जानकारी नियंत्रण कक्ष को मिलेगी। दिल्ली में वर्तमान में कुल 7230 बसें है जिसमें 3900 से अधिक बसें डीटीसी की हैं।
फुटेज देखने की सुविधा
कश्मीरी गेट पर एक कमांड कंट्रोल निगरानी केंद्र के अलावा रिकवरी सेंटर, एक डेटा सेंटर और सभी डिपो में अलग-अलग व्यूइंग सेंटर यानी फुटेज देखने की सुविधा भी बनाई गई है। इससे डिपो प्रबंधक भी लाइव फुटेज की निगरानी कर सकेंगे।
हर सीट पर लगा है पैनिक बटन
नई बसों में बाहर भी कैमरे लगाए गए हैं। इसके साथ हर सीट पर पैनिक बटन की व्यवस्था है, जिसे आपात स्थिति में दबाकर कंट्रोल रूम से जुड़ा जा सके। अगर यात्रा के दौरान कोई बस के अंदर बैठकर पैनिक बटन दबाता है तो उसका अलर्ट सीधे कमांड सेंटर को मिलेगा। वहां बैठा व्यक्ति आईपी कैमरे के जरिए बस के अंदर की लाइव फुटेज देख सकता है। जरूरत पड़ने पर पुलिस कंट्रोल रूम को भी सूचित कर सकता है।
बस परिचालन बेहतर करने में मदद
कमांड कंट्रोल रूम का ट्रायल पूरा हो चुका है। यहां बैठा व्यक्ति एक-एक बस की लोकेशन उसके रूट की जानकारी एक क्लिक पर हासिल कर सकता है। आने वाले दिनों में योजना है इस कमांड कंट्रोल के डाटा के जरिए हमें यह तय करने में मदद मिलेगी कि किस रूट पर कितनी बसें हैं। बसों का प्रयोग (यूटिलाइजेशन) बेहतर तरीके से करने में मदद मिलेगी।












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