दिल्लीः भाजपा के प्रत्याशी उतारने के बाद और सतर्क हुई AAP, इस बार भी हंगामे के आसार
आप ने दिसंबर में हुए नगर निगम चुनाव में 250 वार्डों में से 134 सीटें जीती थीं, भाजपा 104 सीटें जीतने में सफल रही थी। बाद में मुंडका से पार्षद गजेंद्र दराल भाजपा में शामिल हुए।

बहुमत न होने पर भी भाजपा द्वारा दिल्ली नगर निगम में मेयर और उपमेयर पद के लिए प्रत्याशी उतारे जाने से आम आदमी पार्टी (आप) पहले से और सक्रिय हुई है। आप को आशंका कि भाजपा इस बार भी मेयर चुनाव में खेल बिगाड़ने की कोशिश कर सकती है। इसे देखते हुए आप अपने लोगों से इनपुट ले रही है कि भाजपा कहीं कोई जाल तो नहीं फेंक रही है।
आप को भाजपा द्वारा प्रत्याशी खड़े दिए जाने पर आश्चर्य है कि पिछली बार इतनी बुरी तरह से चुनाव हारने के बाद भाजपा ने प्रत्याशी क्यों खड़े किए हैं? जबकि पिछली बार चुनाव में भाजपा के दो पार्षदों ने क्रास वोटिंग कर मेयर पद के लिए आप की प्रत्याशी को वोट दे दिया था। दिल्ली नगर निगम सदन में आप को पूर्ण बहुमत है।
26 मई को मेयर का चुनाव होना है। दिल्ली नगर निगम को लेकर सदस्यों की स्थिति को लेकर आंकलन करें तो नगर निगम के सदन में भाजपा पहले से और कमजोर हुई है। भाजपा पहले जिन 10 एल्डरमैन को मतदान कराने की कोशिश कर रही थी, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह स्पष्ट हो चुका है कि वे अब मेयर के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते हैं। इसके बाद अगर संख्या पर जाएं तो एमसीडी के 250 सदस्यीय सदन में आप के पास स्पष्ट बहुमत है।
निगम चुनाव में 134 सीटें जीती थी AAP
आप ने दिसंबर में हुए नगर निगम चुनाव में 250 वार्डों में से 134 सीटें जीती थीं। भाजपा 104 सीटें जीतने में सफल रही थी। बाद में मुंडका से पार्षद गजेंद्र दराल भाजपा में शामिल हुए। इस तरह भालपा के पास 105 सदस्य हो गए हैं।मेयर के चुनाव के लिए कुल मतदाताओं में दिल्ली से 250 निर्वाचित पार्षद, सात लोकसभा और तीन राज्यसभा सांसद और विधानसभा द्वारा मनोनीत 14 विधायक हैं।
इस तरह मेयर चुनाव के लिए कुल वोट 274 हैं। नंबर गेम आप के पक्ष में है, जिसमें भाजपा के 105 पार्षद, सात लोकसभा सांसद और एक विधायक को मिला लें तो भाजपा के कुल 113 सदस्य बैठते हैं जो सदन में मतदान कर सकते हैं, जबकि भाजपा के 113 के मुकाबले आप के 150 वोट हैं। इसमें 134 आप के पार्षद हैं, 13 विधानसभा अध्यक्ष्र की ओर से मनोनीत किए गए विधायक हैं और तीन राज्यसभा सदस्य हैं।
इस हिसाब से देखें तो सदन में आप भाजपा से बहुत आगे है। किसी भी दल को इतने बडे अंतर के बाद तोड़ पाना किसी के लिए आसान नहीं है। मगर आप इसके बाद भी भाजपा से सचेत है। आप के एक वरिष्ठ नेता ने इस बारे में पूछने पर कहा कि हम भाजपा से डर नहीं रहे हैं मगर सचेत हैं।












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