Jharkhand में नियुक्तियों का रास्ता साफ, नौकरी के लिए राज्य से 10वीं व 12वीं पास करने की बाध्यता खत्म
झारखंड में सरकारी नौकरियों के लिए राज्य के मान्यता प्राप्त स्कूल से दसवीं व बारहवीं की बाध्यता को हटा दिया गया है।

झारखंड में सरकारी नौकरियों के लिए राज्य के मान्यता प्राप्त स्कूल से दसवीं व बारहवीं की बाध्यता को हटा दिया गया है। अब बाहर से भी मैट्रिक-इंटर करने वाले यहां नौकरी पा सकते हैं।
दूसरे राज्यों को भी मौका
झारखंड में सरकारी नौकरियों के लिए राज्य के मान्यता प्राप्त स्कूल से दसवीं व बारहवीं की बाध्यता को हटा दिया गया है। अब बाहर से भी मैट्रिक-इंटर करने वाले यहां नौकरी पा सकते हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में नियोजन नीति में बड़ा बदलाव लाते हुए यह फैसला लिया गया। बैठक में कुल 37 प्रस्तावों पर मुहर लगी।
स्थानीय रीति-रिवाज व भाषा ज्ञान की कंडिका हटाई
जेएसएससी परीक्षा इंटर/ प्लस टू स्तर संचालन नियमावली 2015, स्नातक स्तरीय परीक्षा नियमावली, स्नातक व विशिष्ट योग्यता वाले पद नियमावली, डिप्लोमा नियमावली, झारखंड सेवा संवर्ग नियमावली में परिवर्तन किया गया है। सभी नियमावली से 10 वीं व 12 वीं राज्य से करने व स्थानीय रीति-रिवाज व भाषा ज्ञान की कंडिका हटा दी गई है।
मेधावी विद्यार्थियों को मिलेगा लैपटॉप और मोबाइल
मेधावी छात्रों को लैपटॉप-मोबाइल राज्य कैबिनेट ने दसवीं व बारहवीं की परीक्षा किसी भी बोर्ड से पास करने वाले मेधावी बच्चों को लैपटॉप व मोबाइल देने का फैसला लिया है। दसवीं या बारहवीं में स्कूल में पहले रैंक में आने वाले छात्र को तीन लाख, दूसरे रैंक पर आने वाले छात्र को दो लाख व तीसरे रैंक में आने वाले छात्र को एक लाख मिलेगा। इंटर में साइंस, कामर्स व आर्ट्स तीनों संकायों में पहले, दूसरे व तीसरे रैंक में आने वाले छात्रों को यही लाभ मिलेगा। यह लाभ सीबीएसई स्कूलों के छात्रों को भी दिया जाएगा। छात्रों को दिए जाने वाले लैपटॉप 60 हजार, जबकि मोबाइल 20 हजार कीमत तक के होंगे।
लोक-संस्कृति की जानकारी को नियोजन नीति में जोड़ेंगे
वर्तमान सरकार ने स्थानीय भाषाओं एवं लोक-संस्कृति की जानकारी को नियोजन नीति से जोड़ने का प्रयास किया था। साथ ही, राज्य में स्थित संस्थान से 10वीं /12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण होने की शर्त जोड़ी थी। जिसे हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर को खारिज कर दिया। पूर्व की सरकार के समय लाई गयी 13/11 वाली नियोजन नीति को भी कोर्ट ने रद्द कर दिया था। ऐसे में सरकार ने युवाओं की राय जाननी चाही कि क्या 2016 के पहले की नीति के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
झारखंड के 73 प्रतिशत युवाओं ने इसपर सहमति जताई। इसके बाद सरकार ने इस नियोजन नीति में बदलाव लाने की पहल शुरू की।












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