मक्का प्रसंस्करण इकाई से बदलेगी किसानों की तस्वीर, कैबिनेट ने इथेनाल उत्पादन की मंजूरी दी
कोंडागांव। बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद् की बैठक हुई। इस दौरान मां दंतेश्वरी मक्का प्रसंस्करण और विपणन सहकारी समिति मर्यादित, में मक्का आधारित 80 केएलपीडी क्षमता के इथेनाल संयंत्र की स्थापना पर चर्चा करते हुए कैबिनेट द्वारा इथेनाल उत्पादन की मंजूरी दी है। कुल 135.98 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन प्लांट में प्रतिवर्ष 63600 मैट्रिक टन मक्का का उपयोग इथेनाल निर्माण में किया जाएगा।

124 लोगों को प्रत्यक्ष और 65 हजार किसानों को अप्रत्यक्ष मिलेगा रोजगार
इथेनाल संयंत्र की स्थापना से आगामी पांच वर्ष में संस्था को लगभग 84.73 करोड़ का शुद्ध लाभ संचित होगा। क्षेत्र के 124 ग्रामीणों को प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ 65 हजार किसानों और आस-पास के ग्रामीणों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इससे क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि का आधार मजबूत होगा। इसके लिए मक्का उत्पादक किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मक्के का क्रय कर नियमित समय में भुगतान भी सुनिश्चित किया जाएगा।
जिले के किसानों की ओर से रबी और खरीफ दोनों ही मौसमों में कुल 259750 मैट्रिक टन मक्के का उत्पादन किया जाता है, जिसमें रबी सीजन में 143709 मैट्रिक टन और खरीफ सीजन में 116041मैट्रिक टन मक्के का उत्पादन किया जाता है। इन मक्कों की उपज में से किसान अपना अधिकांश उपज निजी व्यापारियों को 1150 से अधिकतम 1350 रुपये प्रति क्विंटल से विक्रय करते है। जबकि शासन द्वारा मक्के की खरीदी समर्थन मूल्य योजना के तहत समर्थन मूल्य वर्ष 2020-21 में 1850 रुपये प्रति क्विंटल दर निर्धारित की गई थी।
इस प्रकार किसान व्यापारियों को विक्रय करने पर 500 से 700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हानि हो रही है। राज्य शासन किसानों को हो रही हानि को संज्ञान में लेते हुए सहकारिता के माध्यम से सहकारी संस्था का गठन कर किसानों के आर्थिक और सामाजिक उन्नाायन के लिए इथेनाल संयंत्र की स्थापना करने का निर्णय लिया गया था।
सांसद गांधी करेंगे प्लांट का शिलान्यास
जिले में मक्का उत्पादन की बेहतर संभावना को ध्यान में देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दो जनवरी 2019 को अपने कोंडागांव जिले के प्रवास के दौरान मक्का प्रसंस्करण यूनिट स्थापना की घोषणा की थी और सांसद राहुल गांधी ने 16 फरवरी 2019 को इस प्लांट के लिए भूमिपूजन और शिलान्यास किया गया था। पूर्व में जिला प्रशासन द्वारा मक्के से स्टार्च, ग्लूटन आदि निर्माण के लिए संयंत्र की स्थापना के लिए प्रस्तावित किया गया था, किन्तु कोरोना जनित परिस्थितियों के कारण वित्तीय व्यवस्था में विलंब होने से संयंत्र निर्माण की प्रक्रिया बाधित हो गई थी।
सहकारी संस्था करेगी प्लांट का निर्माण
11 अगस्त को सरकारी समिति की आमसभा में समिति के सदस्य किसानों द्वारा इथेनाल संयंत्र की स्थापना पर सहमति दी गई। प्रक्रियाधीन संयंत्र के डूबंत व्यय की राशि 5.99 करोड़ रुपये का भार संस्था के सदस्यों द्वारा जमा की गई अंशपूजी की राशि पर भारित न करते हुए शासन द्वारा वहन करने तथा इथेनाल संयंत्र पीपीपी मोड में न करते हुए संस्था द्वारा स्वयं किये जाने का निर्णय लिया गया। इस हेतु शासन को प्रस्ताव प्रेषित किया गया था। संस्था से प्राप्त प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद् द्वारा मक्का आधारित इथेनाल संयंत्र की स्थापना सहित डूबंत व्यय की राशि रुपये 5.99 करोड़ को राईटआफ करते हुए वित्तीय भार राज्य शासन द्वारा वहन करने और इथेनाल संयंत्र का निर्माण संस्था द्वारा स्वयं किए जाने का निर्णय लिया गया है।












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