फिर दिखा केंद्र सरकार का दोहरा रवैया, तेलंगाना में एम्स के लिए रोका फंड

बीबीनगर में एम्स के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 17 दिसंबर, 2018 को 1365.95 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर मंजूरी दी थी और इसे अक्टूबर 2024 तक पूरी किया जाना है।

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गैर-भाजपा शासित राज्यों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए धन के आवंटन में केंद्र सरकार को दोहरा रवैया एक बार फिर सामने आया है। नलगोंडा जिले के बीबीनगर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को किया गया धन आवंटन तेलंगाना पर मोदी सरकार के पक्षपातपूर्ण रवैये का सबसे ताजा उदाहरण है।

बीबीनगर में एम्स के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 17 दिसंबर, 2018 को 1365.95 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर मंजूरी दी थी और इसे अक्टूबर 2024 तक पूरी किया जाना है। लेकिन, अगर फंड आवंटन पर नजर डाली जाए, तो ऐसा कोई संकेत नजर नहीं आता, जिससे लगे कि इस एम्स को अगले अक्टूबर तक पूरी तरह से शुरू किया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने अब तक इस परियोजना के लिए 1365.95 करोड़ रुपये में से 156.01 करोड़ रुपये ही जारी किए हैं और केंद्र की विपक्षी पार्टियों शासित राज्यों के प्रति लापरवाही बरतने के रवैये को देखते हुए बीबीनगर का एम्स तय समय पर पूरा नहीं हो सकता, जिसमें अब केवल बहुत ही कम यानी 19 महीने का समय बचा है। अब तक जारी की गई धनराशि लगभग 11.4 प्रतिशत है और कोई भी अनुमान लगा सकता है कि भाजपा सरकार कैसे पूरी परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल रही है।

केंद्र ने 2014 में 16 एम्स स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन केवल सात संस्थानों के संबंध में भवनों का निर्माण पूरा हुआ, जबकि अन्य पूरा होने के विभिन्न चरणों में हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा इनगंती रवि कुमार की तरफ से दाखिल आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में जवाब दिया गया कि केवल तेलंगाना और तमिलनाडु के संस्थानों को आवंटन का सबसे छोटा प्रतिशत प्राप्त हुआ है।

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