हरियाणा CM मनोहर लाल को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने चुनाव में गड़बड़ी की पिटीशन खारिज की

Big relief to Haryana CM Manohar Lal, High Court dismisses election malpractices petition

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। 2019 में उनके विधानसभा चुनाव को रद्द करने की याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। यह याचिका उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले आजाद प्रत्याशी रमेश खत्री ने डाली थी। याचिका में आरोप लगाए गए थे कि मुख्यमंत्री ने चुनाव में प्रशासनिक अमले का दुरुपयोग किया है।

2019 में चुनाव के दौरान रमेश खत्री ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर सत्ता के प्रभाव में वोटिंग के दौरान गड़बड़ी किए जाने के आरोप लगाए थे। साथ ही हाईकोर्ट से इस चुनाव को अवैध मानकर रद किए जाने की मांग याचिका में की गई थी।

एडवोकेट जनरल ने आरोपों को नकारा
हरियाणा के एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन ने मुख्यमंत्री पर लगाए सभी आरोपों का खंडन किया है। वह आज इस मामले में हाईकोर्ट के समक्ष पेश हुए थे। हाईकोर्ट ने केस से जुड़े सभी तथ्यों की जांच पड़ताल के बाद याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट की ओर से कहा गया कि याची के द्वारा जो भी सूबत पेश किए गए हैं वह आरोपों की पुष्टि नहीं कर पाए।

2020 में CM को जारी हुआ नोटिस
हरियाणा के करनाल जिले से विधायक और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने सीएम को 2020 में नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए थे। याचिका दाखिल करते हुए निर्दलीय उम्मीदवार रहे रमेश खत्री ने हाईकोर्ट को बताया कि मनोहर लाल ने जन प्रतिनिधि अधिनियम के तहत यह चुनाव नहीं लड़ा, इसलिए उनका निर्वाचन रद्द किया जाए। साथ ही अगले 6 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की अपील भी की गई।

याचिका में ये लगाए गए आरोप
आजाद उम्मीदवार खत्री ने दलील HC में दलील दी कि मनोहर लाल ने जितनी भी चुनावी रैलियां की उनमें हुए खर्च का सही तरीके से हिसाब नहीं रखा। प्रशासनिक अधिकारी से लेकर बड़े-बड़े नेताओं ने रैलियों में शिरकत की। इस दौरान चंडीगढ़ बीजेपी के अध्यक्ष संजय टंडन ने 500 लोगों के साथ मिल कर डोर-2-डोर कैंपेन चलाया। इतना ही नहीं करनाल के बड़े होटल में प्रेसवार्ता आयोजित की, जिसका खर्च भी नहीं दिखाया गया।

पानी की तरह बहाया पैसा
याचिका में आरोप लगाए गए थे कि आयोग ने खर्च की सीमा 28 लाख रुपए रखी थी, लेकिन मनोहर लाल को जिताने के लिए पैसा पानी की तरह बहाया गया। मनोहर लाल के प्रचार के लिए स्टार प्रचारक आए और उन्होंने बड़ी बड़ी रैलियां कीं और इस दौरान बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और सबके हाथ में प्रचार सामग्री थी। साथ ही जितने वाहन शामिल हुए, उनमें लगने वाले डीजल व पेट्रोल तक का ब्योरा नहीं दिया गया।

फर्जी वोट मैनेजमेंट हुआ
चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने फर्जी वोट मैनेजमेंट से जीत हासिल की। पैसे के दम पर मीडिया मैनेजमेंट किया गया और लोगों के बीच मनोहर लाल की जीत तय दिखाई गई। ऐसे में याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि मनोहर लाल के निर्वाचन को भ्रष्ट साधनों वाला मानते हुए उनके निर्वाचन को रद्द किया जाए और उनके चुनाव लड़ने पर 6 साल का प्रतिबंध लगाया जाए।

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