छत्तीसगढ़ के पौराणिक इतिहास को सजीव कर रही भूपेश सरकार, पुरातन सभ्यताओं को जिंदा रखने हो रहा अनुपम प्रयास
रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा छत्तीसगढ़ की गौरवशाली संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु निरंतर प्रयास किया जा रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप आज छत्तीसगढ़ की पहचान पूरे देश एवं दुनिया में बनी है। छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत की जानकारी नई पीढ़ी को देना अत्यंत आवश्यक है, जिससे कि हमारी आगामी पीढ़ी को अपने संस्कृति का गौरवबोध हो सके। छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा युवा महोत्सव, राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव, छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक आदि आयोजनों से अपने विरासत को सहेजने तथा इसकी विशिष्टता को पूरे देश और दुनिया को अवगत कराने का कार्य किया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप देश और दुनिया में छत्तीसगढ़ की ख्याति फैल रही है।
इसके अलावा प्रदेश की पुरातन सभ्यता को सहेजने के प्रयासों का भी आज राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है। छत्तीसगढ़ की धरा प्राचीन इतिहास और सभ्यता को समेटे हुए है। यही वजह है कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों में पुरातन काल के मंदिर, मठ और इमारतें स्थित है। निरंतर अनदेखी और संरक्षण के अभाव में यह इतिहास मिटने के करीब था लेकिन मौजूदा राज्य सरकार ने पृथक-पृथक कार्ययोजना तैयार कर उन्हें संवारने, सहेजने की दिशा में कदम बढ़ाया है। आइये जानते हैं इस दिशा में राज्य सरकार की ओर से कराये गए प्रमुख कार्ययोजनाओं के बारे में...

रामायण के मुताबिक भगवान राम ने वनवास का वक्त दंडकारण्य में बिताया। छत्तीसगढ़ का बड़ा हिस्सा ही प्राचीन समय का दंडकारण्य माना जाता है। अब उन जगहों को नई सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है, जिन्हें लेकर यह दावा किया जाता है कि वनवास के वक्त भगवान यहीं रहे।












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