भारत का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक पोल. क्या आपने भाग लिया?
  • search

शनिदेव के प्रिय शमी की पूजा आखिर क्यों की जाती है दशहरे पर?

Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts
    Shami Plant

    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में तुलसी, पीपल, बरगद, आम, अशोक जैसे वृक्षों के साथ शमी को भी पूजनीय स्थान प्राप्त है। शमी शनिदेव को अत्यंत प्रिय है। जिस व्यक्ति पर शनि की साढ़ेसाती चल रही हो, शनि का ढैया हो या जन्मकुंडली में शनि बुरे प्रभाव दे रहा हो, उन्हें शमी के पौधे की नियमित सेवा-पूजा करने की सलाह ज्योतिषियों द्वारा दी जाती है। लेकिन शमी की पूजा विजयादशमी यानी रावण दहन के दिन क्यों की जाती है? आखिर शमी और रावण दहन के बीच क्या संबंध है।

    शमी और शनि का संबंध

    शमी और शनि का संबंध

    सबसे पहले बात करते हैं शमी और शनि के बीच संबंध की। वैदिक ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह से जुड़ी वनस्पतियों का वर्णन मिलता है। नवग्रहों के लिए एक-एक पेड़ निर्धारित है। उसमें संबंधित ग्रह का वास माना गया है। शमी में शनि का वास है और शमी की पूजा करने से साक्षात शनिदेव की पूजा के समान फल मिलता है। खासकर जिन लोगों की कुंडली में शनि बुरे प्रभाव दे रहा हो वे यदि नियमित रूप से शमी के पौधे या वृक्ष में जल चढ़ाएं, उसके आसपास साफ-सफाई रखें और शाम के समय उसके नीचे तिल के तेल का दीपक लगाएं तो उन्हें शनि के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है और वे शनि के विशेष कृपापात्र बन जाते हैं।

    ये भी पढ़ें:Navratri 2018: धन संकट से मुक्ति और सफलता पाने के लिए कीजिए इन मंत्रों का जाप

    शनि और रावण का संबंध

    शनि और रावण का संबंध

    अब बात करते हैं शनि और रावण के संबंध की। रावण ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया था। भगवान शिव की कृपा मिलने के बाद रावण ने नवग्रहों को अपने अधीन कर लिया था और शनि को बंदी बनाकर अपने सिंहासन में पैरों के नीचे बांध दिया था। रावण ज्योतिष और तंत्र-मंत्र का प्रकांड विद्वान था। उसके समान पृथ्वी पर इन विषयों के किसी अन्य जानकार व्यक्ति ने जन्म नहीं लिया। रावण को यह भलीभांति भान था कि उसके पतन का कारण केवल और केवल शनि ही बनेगा। इसलिए उसने सबसे पहले शनि को बंदी बनाया था। लेकिन जब हनुमानजी भगवान श्रीराम का शांति प्रस्ताव लेकर रावण के पास आए थे तभी उन्होंने रावण की चंगुल से शनिदेव को मुक्त कराया था। तभी से हनुमानजी की पूजा से शनि की कृपा प्राप्त होती है। रावण की कैद से मुक्त होने के बाद शनिदेव ने कुछ समय के लिए शमी वृक्ष पर विश्राम किया था। रावण से युद्ध के पूर्व भगवान श्रीराम ने शमी वृक्ष की पूजा की थी और अपनी विजय की कामना की थी। उसी के बाद वे रावण पर विजय प्राप्त कर सके। रावण की मृत्यु के बाद शमी को पूजनीय मानते हुए लंका और अयोध्यावासियों ने एक-दूसरे को शमी की पत्तियां भेंट करके उनकी सर्वत्र विजय की कामना की थी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

    शमी का ज्योतिषीय महत्व

    शमी का ज्योतिषीय महत्व

    - शमी वृक्ष की पूजा से शनि की पीड़ा तो शांत होती ही है। हनुमानजी की भी विशेष कृपा प्राप्त होता है।
    - आर्थिक संकटों के नाश के लिए शनि-पुष्य नक्षत्र में शमी का पौधा घर लाकर उसका पंचोपचार पूजन करें और फिर नियमित उसकी सेवा करें।
    - सर्वत्र विजय के लिए रवि-पुष्य नक्षत्र में शमी वृक्ष के नीचे शुद्ध घी का दीपक लगाएं।
    - शमी भगवान गणेश को भी अत्यंत प्रिय है। आर्थिक संपन्न्ता और सिद्धि-बुद्धि की प्राप्ति के लिए प्रत्येक बुधवार को श्रीगणेशजी को 108 पत्ती शमी की अर्पित करें।

    ये भी पढ़ें:दशहरा-नवरात्र पर स्पेशन कवरेज के लिए क्लिक करें

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    Why Shanidev's Shami Plant Is Worshipped On Dussehra? Know The Reason Here.

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more