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Ram Temple Ayodhya: अयोध्या में दोबारा क्यों हुआ प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम? क्या होती है Pran Pratishtha?

Ram Temple Ayodhya: अयोध्या के राममंदिर का आज ऐतिहासिक दिन है। गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर 5 जून को राम मंदिर परिसर में सामूहिक प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया। सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद यहां पर पूजा अर्चना शुरू की। अब आप आपके दिमाग में सवाल होगा कि अयोध्या में तो रामलला पहले ही स्थापित हो चुके हैं, ऐसे में वहां प्राण प्रतिष्ठा दोबारा क्यों हुई?

तो इसका जवाब ये है कि 22 जनवरी 2024 को भगवान राम बालक रूप में अयोध्या में स्थापित किए गए थे लेकिन अब दूसरी बार वो राजा के रूप में स्थापित किए गए हैं और मंदिर के प्रथम तल पर उनका दरबार सजा है।

Pran Pratishtha

प्रभु राम के दरबार की हो रही है प्राण-प्रतिष्ठा

जहां वो मां सीता, अपने तीनों प्रिय भाई लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और परम भक्त हनुमान संग विराजंमान हुए हैं, एक तरह से ये मंदिर निर्माण के समापन का भी कार्यक्रम है, जो कि साल 2020 से शुरू हुआ था, अब मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है।

क्या होती है प्राण प्रतिष्ठा? (Ram Temple Ayodhya)

प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है - मूर्ति में 'प्राण' या दिव्य ऊर्जा का प्रवेश कराना, किसी निर्जीव मूर्ति में चेतन शक्ति का प्रवाह करना ही 'प्राण प्रतिष्ठा' है। आपको बता दें कि 'प्राण प्रतिष्ठा'के बाद ही मूर्ति पूजा के योग्य बनती है। पंडित गजेंद्र शर्मा के मुताबिक यदि प्राण प्रतिष्ठा नहीं होगी तो वह मूर्ति सिर्फ एक पत्थर होगी। इस प्रक्रिया में वैदिक मंत्रों के माध्यम से संबंधित देवी या देवता की चेतना को मूर्ति में आमंत्रित किया जाता है।

कैसे होती है प्राण प्रतिष्ठा? (Ram Temple Ayodhya)

प्राण प्रतिष्ठा एक विधिपूर्वक अनुष्ठान होता है जिसे विशेष रूप से प्रशिक्षित पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रों के माध्यम से सम्पन्न किया जाता है। इसमें प्रमुख रूप से चार चरणों का प्रयोग किया जाता है।

क्या प्राण प्रतिष्ठा के बाद विसर्जन होता है? (Ram Temple Ayodhya)

नहीं, जब भी किसी मंदिर में मूर्ति को स्थायी रूप से स्थापित किया जाता है तो उसका विसर्जन नहीं किया जाता है किंतु जब हम अस्थायी रूप से पार्थिव मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा करते हैं तो उसका विसर्जन करना आवश्यक होता है। जैसे अयोध्या में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई है तो अब वो स्थायी मूर्ति है इसलिए उसकी विसर्जन प्रक्रिया नहीं होगी।

प्राण प्रत्यावर्तन या प्राणोत्सर्ग (Ram Temple Ayodhya)

लेकिन जब किसी अनुष्ठान में मूर्तियों में देवी-देवताओं का आहवान करते हैं तो उनका विसर्जन करना आवश्यक होता है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद यदि उस प्रतिष्ठित मूर्ति को विसर्जित (त्याग) करना हो, तो उससे पहले प्राण विसर्जन या प्राण उत्सर्जन करना आवश्यक होता है। इसे संस्कृत में प्राण प्रत्यावर्तन या प्राणोत्सर्ग कहा जाता है।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।

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