• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

Vishwakarma Puja 2020: ब्रह्मांड के सबसे पहले वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा

By Pt. Gajendra Sharma
|

नई दिल्ली। ब्रह्मांड के सबसे पहले वास्तुकार, इंजीनियर भगवान विश्वकर्मा की जयंती आज है, बता दें कि भगवान विश्वकर्मा का जन्म कन्या संक्रांति में हुआ था, संपूर्ण भारत में इस दिन उद्योगों, फैक्टरियों आदि में मशीनों की पूजा की जाती है। भारत के कर्नाटक, असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, त्रिपुरा में बड़े पैमाने पर मनाई जाती है।

ब्रह्मांड के सबसे पहले वास्तुकार हैं भगवान विश्वकर्मा

ब्रह्मांड के सबसे पहले वास्तुकार हैं भगवान विश्वकर्मा

पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के लिए अस्त्र, शस्त्र, भवनों और स्वर्गपुरी का निर्माण किया था। धरती पर मौजूद सप्तपुरियों का निर्माण भी विश्वकर्मा के हाथों माना जाता है। विश्वकर्मा ने सृष्टि की रचना में भगवान ब्रह्मा की सहायता की थी, इसलिए इंजीनियरिंग से जुड़े कार्यों में लगे लोग विशेषतौर पर इनकी पूजा करते हैं।

यह पढ़ें: Indira Ekadashi 2020: पितरों की मुक्ति के लिए करें इंदिरा एकादशी व्रत

कैसे हुई भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति

कैसे हुई भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति

पौराणिक कथाओं के अनुसार धर्म की वस्तु नामक स्त्री से उत्पन्न वास्तु के सातवें पुत्र थे, जो शिल्पशास्त्र के प्रवर्तक थे। वास्तुदेव की अंगीरसी नामक पत्नी से विश्वकर्मा का जन्म हुआ था, अपने पिता की तरह विश्वकर्मा भी वास्तुकला के अद्वितीय आचार्य बने।

विश्वकर्मा पूजा विधि

विश्वकर्मा जयंती के दिन भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र की पूजा अक्षत, हल्दी, फूल, पान, लौंग, सुपारी, मिठाई, फल, धूप, दीप और रक्षासूत्र से पूजा शुरू करें। इसके बाद समस्त मशीनों, उपकरणों आदि की पूजा करें।

व्रज से लेकर पुष्पक विमान तक बनाया

व्रज से लेकर पुष्पक विमान तक बनाया

एक पौराणिक कथा के अनुसार समस्त देवता असुरों से परेशान हो गए थे। उनके लिए विश्वकर्मा ने महर्षि दधीची की हड्डियों से एक कठोर वज्र तैयार किया था, जिसका प्रयोग करे इंद्र ने असुरों का नाश किया था। यही कारण है कि भगवान विश्वकर्मा का सभी देवताओं में विशेष स्थान है। विश्वकर्मा ने अपने हाथों से कई संरचनाएं की थीं। माना जाता है कि उन्होंने रावण की लंका, कृष्ण नगरी द्वारिका, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ नगरी और हस्तिनापुर का निर्माण किया था। ओडिशा में स्थित जगन्नाथ मंदिर के लिए भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्ति का निर्माण अपने हाथों से किया था। इसके अलावा उन्होंने कई हथियारों का निर्माण किया था जैसे कि भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र और यमराज का कालदंड मुख्य हैं। इसके साथ ही उन्होंने दानवीर कर्ण के कुंडल और पुष्पक विमान की भी संरचना की थी। रावण के अंत के बाद राम, लक्ष्मण, सीता और अन्य सभी साथी इस विमान पर बैठकर अयोध्या वापस लौटे थे।

यह पढ़ें: Pitru Paksha 2020: श्राद्ध पक्ष में अन्नदान है सर्वश्रेष्ठ, पढ़ें ये कथा

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Vishwakarma Puja, also known as Vishwakarma Jayanti, Biswakarma Puja or Biswa Karma Puja, is celebrated on September 16. The day marks the birth of Hindu God Vishwakarma, the ‘architect’ of the gods.
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X