जानिए पुराणों के अनुसार किन लड़कियों से शादी नहीं करनी चाहिए..
नई दिल्ली। शादी जीवन का वो जरूरी हिस्सा है जिसमें गलत दांव लगने पर केवल जिंदगीभर का अफसोस और बर्बादी है इसलिए जीवन के इस सबसे महत्वपूर्ण संस्कार के लिए हमारे पुराणों में काफी अद्भूभुत और जरूरी बातें बतायी गईं हैं जिनका पालन करके आप अपने लिए सही जीवन साथी चुन सकते हैं।
आज हम आपको बताते हैं कि विष्णु पुराण में किस तरह की लड़कियों से शादी करने से रोका गया है लेकिन आईये इससे पहले जानते हैं कि
क्या है विष्णु पुराण?
विष्णुपुराण 18 पुराणों में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और प्राचीन है। यह श्री पराशर ऋषि द्वारा लिखि्त है। यह इसके प्रतिपाद्य भगवान विष्णु हैं, जो सृष्टि के आदिकारण, नित्य, अक्षय, अव्यय तथा एकरस हैं। इस पुराण में आकाश आदि भूतों का परिमाण, समुद्र, सूर्य आदि का परिमाण, पर्वत, देवतादि की उत्पत्ति, मन्वन्तर, कल्प-विभाग, सम्पूर्ण धर्म एवं देवर्षि तथा राजर्षियों के चरित्र का विशद वर्णन है। इस पुराण में भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण से जुड़ी बातें हैं।
आईये जानते हैं इस पुराण के लिए किस तरह की लड़कियां विवाह के लिए फिट हैं...

एक ही गोत्र वाली लड़की
हमेशा ऐसी लड़की से शादी करने से बचना चाहिए जो कि रिलेशन में हो, क्योंकि पुराण के मुताबिक ऐसा करने से वंशावली अच्छी नहीं होती है, लोगों की जींस में पुरानी बीमारियां फैलने का डर होता है।

आलसी
जो लड़की आलसी होती है, उसके आने से घर का भला कभी नहीं हो सकता है इसलिए ऐसी लड़कियों से शादी करने से बचना चाहिए, अब आप पूछेंगे कि यह पता कैसे चलेगा कि कौन सी लड़की आलसी है और कौन सी नहीं तो इसका आसान सा रास्ता है कि आप लड़की से सीधे पूछ लीजिये कि वो कितने बजे सो कर उठती है, जो लेट उठती है वो ही आलसी होगी।

पुरुष से संबंध रखने वाली
पुराण के मुताबिक लड़कियों को लड़कों से दोस्ती नहीं करनी चाहिए लेकिन ऐसा आज के परिवेश में संभव नहीं है,ऐसे में आप लड़की से पूछ सकते हैं कि उसकी दोस्ती किस हद तक है, अगर वो मित्रता तक है तो ठीक है लेकिन अगर उससे आगे है तो यह शादी के लिए गड़बड़ हो सकता है ।

तेज और तीखा बोलने वाली
जो लड़कियां तेज और तीखा बोलती हैं वो काफी तेज-तर्रार होती हैं, जो कि जीवन में मिठास नहीं घोल सकती हैं इसलिए ऐसी लड़कियों से विवाह करने से बचना चाहिए।

हर समस्या का समाधान: विष्णु पुराण
विष्णु पुराण में इस समय सात हजार श्लोक उपलब्ध हैं। वैसे कई ग्रन्थों में इसकी श्लोक संख्या तेईस हजार बताई जाती है। विष्णु पुराण में पुराणों के पांचों लक्षणों अथवा वर्ण्य-विषयों-सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वन्तर और वंशानुचरित का वर्णन है। सभी विषयों का सानुपातिक उल्लेख किया गया है। बीच-बीच में अध्यात्म-विवेचन, कलिकर्म और सदाचार आदि पर भी प्रकाश डाला गया है। प्रत्यके सनातन धर्म के लोगों को एक बार इसका पाठ जरूर करना चाहिए क्योंकि इसमें हर समस्या का समाधान है।

यह भी जानिए कि पुराणों मे क्यों कहा गया है कि जमीन पर बैठकर खाना खाओ?
अक्सर हम जब किसी धार्मिक आयोजन में जाते हैं तो हम देखते हैं कि वहां लोगों को खाना जमीन पर बैठकर खिलाया जा रहा है। अब वो चाहे लंगर हो या भंडारा, पूजा-पाठ हो या फिर जाप-मंत्र का कार्यक्रम हर जगह साधु-पंडितों को खाना जमीन पर बिठाकर खिलाया जाता है क्या कभी आपने सोचा है क्यों?












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