आज के दिन भूलकर भी ना करें ये काम वरना श्री हरि हो जाएंगे नाराज, टूटेगा फिर दुखों का पहाड़
Shri Vishnu Chalisa on Thursday: गुरुवार का दिन भगवान विष्णु यानी श्री हरि को समर्पित हैं, वो ही पालनकर्ता हैं। वो ही सबकी बिगड़ी बनाने वाले हैं।
आज के दिन जो भी उनकी सच्चे मन से पूजा करता है, उसकी सारी समस्याएं तो दूर होती ही है साथ ही उसे यश की प्राप्ति भी होती है और उसे तरह का सुख मिलता है।

आज के दिन आपको घर में सुख-शांति रखनी चाहिए, किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए, किसी से झगड़ना नहीं चाहिए। घर में मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। जो कोई भी ऐसा करता है उसे भगवान विष्णु के गुस्से का शिकार होना पड़ा सकता है इसलिए आज के दिन आपको इन सारी बातों का ध्यान रखना बहुत ज्यादा जरूरी है।
तो वहीं दूसरी और आप सभी को भगवान विष्णु की चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से आपके सारे पापों का अंत हो जाएगा और आपके घर में हमेशा सुख, शांति और समृद्धि बनी रहेगी।
यहां पढ़ें विष्णु चालीसा ( Lord Vishnu Chalisa)
॥ दोहा॥
- विष्णु सुनिए विनय
- सेवक की चितलाय ।
- कीरत कुछ वर्णन करूं
- दीजै ज्ञान बताय ॥
चौपाई
- नमो विष्णु भगवान खरारी,
- कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
- प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी,
- त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥
- सुन्दर रूप मनोहर सूरत,
- सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
- तन पर पीताम्बर अति सोहत,
- बैजन्ती माला मन मोहत ॥
- शंख चक्र कर गदा विराजे,
- देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
- सत्य धर्म मद लोभ न गाजे,
- काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥
- सन्तभक्त सज्जन मनरंजन,
- दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
- सुख उपजाय कष्ट सब भंजन,
- दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥
- पाप काट भव सिन्धु उतारण,
- कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
- करत अनेक रूप प्रभु धारण,
- केवल आप भक्ति के कारण ॥
- धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा,
- तब तुम रूप राम का धारा ।
- भार उतार असुर दल मारा,
- रावण आदिक को संहारा ॥
- आप वाराह रूप बनाया,
- हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
- धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया,
- चौदह रतनन को निकलाया ॥
- अमिलख असुरन द्वन्द मचाया,
- रूप मोहनी आप दिखाया ।
- देवन को अमृत पान कराया,
- असुरन को छवि से बहलाया ॥
- कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया,
- मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
- शंकर का तुम फन्द छुड़ाया,
- भस्मासुर को रूप दिखाया ॥
- वेदन को जब असुर डुबाया,
- कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
- मोहित बनकर खलहि नचाया,
- उसही कर से भस्म कराया ॥
- असुर जलन्धर अति बलदाई,
- शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
- हार पार शिव सकल बनाई,
- कीन सती से छल खल जाई ॥
- सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी,
- बतलाई सब विपत कहानी ।
- तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी,
- वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥
- देखत तीन दनुज शैतानी,
- वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
- हो स्पर्श धर्म क्षति मानी,
- हना असुर उर शिव शैतानी ॥
- तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे,
- हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
- गणिका और अजामिल तारे,
- बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥
- हरहु सकल संताप हमारे,
- कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
- देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे,
- दीन बन्धु भक्तन हितकारे ॥
- चाहता आपका सेवक दर्शन,
- करहु दया अपनी मधुसूदन ।
- जानूं नहीं योग्य जब पूजन,
- होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥
- शीलदया सन्तोष सुलक्षण,
- विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
- करहुं आपका किस विधि पूजन,
- कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥
- करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण,
- कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
- सुर मुनि करत सदा सेवकाई,
- हर्षित रहत परम गति पाई ॥
- दीन दुखिन पर सदा सहाई,
- निज जन जान लेव अपनाई ।
- पाप दोष संताप नशाओ,
- भव बन्धन से मुक्त कराओ ॥
- सुत सम्पति दे सुख उपजाओ,
- निज चरनन का दास बनाओ ।
- निगम सदा ये विनय सुनावै,
- पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥
- ॥ इति श्री विष्णु चालीसा ॥
Disclaimer: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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