मारुति की कहानी में सक्‍सेस का मंत्र

RC Bhargava
एक समय था जब कार खरीदना भारत के मध्‍यमवर्गीय लोगों का सपना हुआ करता था। लेकिन आज अपने बजट में और बहुत कम खर्च वाली मारुति कार इस सपने को साकार करती हुई देश की सड़कों पर दौड़ रही है। जी हां अपका यह सपना साकार किया कार बनाने वाली कंपनी मारुति सुजूकी ने।

ज़रा सो‍चिए आप तक छोटी और बेहतरीन कारें पहुंचाने के लिए कंपनी को किन-किन पड़ावों से गुजरना पड़ा। दो साल से अधिक समय सिर्फ इस सरकार की मंजूरी में लगा, फिर एक अच्‍छे पार्टनर की तलाश में कंपनी ने दुनिया भर के बाजारों को छाना, फिर मिला सुजूकी मोटर कार्पोरेशन। देश में मारुति कारों की फैक्‍ट्री लगाने, देश भर के शहरों तक कारों की बिक्री के लिए नेटवर्क बनाने और लोगों के लिए कार खरीदना आसान बनाने में मारुति उद्योग लिमिटेड ने जी तोड़ मेहनत की और आखिर कार मेहनत रंग लायी। आज आलम यह है कि देश में मारुति की दस लाख से ज्‍यादा कारें हर साल बिकती हैं।

ऑटोमोबाइल जगत में क्रांति लाई

जिन परिस्थितियों से गुजरने के बाद मारुति कार 1983 में सड़कों पर उतरी उनकी आप कल्‍पना भी नहीं कर सकते। उस दौर की सबसे छोटी मारुति 800 कार ने धूम मचा दी। ऑटोमोबाइल उद्योग में एक क्रांति आ गई। इस कार के आने के बाद आम आदमी भी कार खरीदने में सक्षम बना। देखते ही देखते सुजूकी कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर मारुति ने एक के बाद एक मॉडल निकाले। मारुति के सभी मॉडलों को जबरदस्‍त सफलता मिली और आज भी हर नए मॉडल धूम मचा रहे हैं।

26 साल बाद आज कंपनी सरकारी नियंत्रण से मुक्‍त हो चुकी है और अब मारुति सुजूकी कार बनाने वाली विश्‍व की सबसे बड़ी कंपनी बनने की ओर अग्रसर है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि एशिया के कई देशों की सड़कों पर मरुति कारें दौड़ रही हैं। वो भी तेज गति से।

मारुति की कहानी

मारुति सुजूकी की इस सफलता के पीछे मारुति उद्योग लिमिटेड के चेयरमैन आरसी भार्गव का काफी बड़ा हाथ रहा है। आरसी भार्गव 1981 में डायरेक्‍टर (मार्केटिंग) के रूप में कंपनी से जुड़े थे। 1884 में वो कंपनी के ज्‍वाइंट डायरेक्‍टर हो गए, 1985 में मैनेजिंग डायरेक्‍टर बने, 1990 में वे मारुति उद्योग लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्‍टर बने। उसके बाद 1998 में कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के अध्‍यक्ष व सीईओ और 2003 में मारु‍ति उद्योग लिमिटेड के निदेशक। 2007 में मारुति उद्योग लिमिटेड का नाम बदलकर मारुति सुजूकी इंडिया लिमिटेड हुआ और भर्गव उसके चेयरमैन बने।

कंपनी के सभी अच्‍छे और बुरे दिन देखने वाले भार्गव ने वरिष्‍ठ पत्रकार एवं लेखक सीता के साथ मिलकर मारुति की कहानी को पन्‍नों पर उतारा है। किताब का नाम है 'दि मारुति स्‍टोरी' यानि मारुति की कहानी। सफलता के मूलमंत्र लिए हुई यह किताब आपके जीवन में परिवर्तन ला सकती है।

यह किताब आपकी सोच बदल देगी यही नहीं प्रतिस्‍पर्धा की दौड़ में सबसे अलग कार्य करने की प्रेरणा देती है। सफलता के राज लिए हुई इस किताब को आप जरूर पढ़ें। यह छप चुकी है, बस बाजार में आने की देर है। आप दैट्स हिन्‍दी के माध्‍यम से किताब की ओरीजनल प्रति की अभी और इसी वक्‍त एडवांस बुकिंग कर सकते हैं। वो भी 30 प्रतिशत छूट पर।

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