पुस्तक समीक्षा: द डबल लाइफ ऑफ रामालिंगा राजू

भारतीय कॉर्पोरेट के इतिहास में देश की अग्रणी सॉफ्टवेयर कंपनी सत्यम को आगे बढ़ाने वाले रामालिंगा राजू की कहानी का कोई मुकाबलना नहीं है। राजू ने 200 करोड़ डॉलर की कंपनी इतने कम समय में खड़ी कर दी, वो भी दरिद्रता की ओर ढकेलने के लिए। देश् के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घोटाले के पीछे इस आईटी व्यापारी का मकसद सिर्फ एक था, अपने पारिवार के परंपरागत व्यापार को आगे बढ़ाना।
ऐसा करने के लिए राजू ने सत्यम के साथ-साथ रियल एस्टेट कंपनी माइटास इंफ्रा में भी अपनी हिस्सेदारी दर्ज की, और कथित तौर पर दोनों कंपनियों से अवैध तरीके से धन निकालने का इंतजाम कर दिया। राजू ने धोखाधड़ी करते हुए सत्यम की फाइलों में कंपनी के राजस्व और मुनाफे को खुलकर दिखाया, जिससे कंपनी के शेयरों के दाम ऊपर चढ़ते जाएं। राजू ऐसा आठ साल तक करता रहा। 2008 की आर्थिक मंदी ने राजू के गंदे पानी पर प्रहार किया और घोटाले का बड़ा बुलबुला ऊपर आ गया।
आईटी उद्योग में इत्तफाक से प्रवेश करने वाले राजू स्वयं टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल नहीं थे। देखते ही देखते राजू ने पांच महाद्वीपों के 60 देशों में अपनी कंपनी को फैला दिया और देखते ही देखते हैदराबाद के आईकन बन गए।
शक्तिशाली और अमीर बनने तक राजू ने सत्म के समानांतर एक रियल एस्टेट का साम्राज्य खड़ा कर दिया और हैदराबाद मेट्रो रेल प्रोजेक्ट पर बोली लगाने तक की हैसियत जुटा ली। यही प्रोजेक्ट राजू के इस साम्राज्य को नष्ट करने का सबसे बड़ा कारण बना।
राजू ने आईटी और रियल एस्टेट के साम्राज्यों को कैसे खड़ा किया? इतने लंबे समय के लिए नियमों को कैसे तोड़ते हुए शेयरधारकों और अपने कर्मचारियों को धोखा देता रहा? ऐसे तमाम सवालों के जवाब आपको टाइम्स ऑफ इंडिया के हैदराबाद संस्करण के संपादक किगशुक नाग की किताब "द डबल लाइफ ऑफ रामालिंगा राजू" ने राजू के जीवन के इन्हीं उतार चढ़ाव को नाटकीय ढंग से उकेरा है।
यह एक ऐसी दिलचस्प कहानी है, जिसे सभी को जरूर पढ़ना चाहिए। इस कहानी में वो सत्य छिपा है, जो एक गांव का उस लड़के की कहानी को बयां करता है, जो गलत रास्ता अपनाते हुए साधारण व्यक्ति से अरबपति बन गया और जरूरत से ज्यादा महत्वकांक्षी होने के कारण कानून के फंदे में फंस गया। इसमें सदियों पुरानी कहानी नहीं, वर्तमान है, जिससे हम सभी इत्तेफाक रखते हैं। भले ही अभी तक एक व्यक्ति पकड़ में आया हो, लेकिन आपके आस-पास बहुत सारे ऐसे राजू घूम रहे हैं। इस पुस्तक में उदारीकरण के एक अहम पक्ष को सामने रखा गया है।
तो आज और अभी यह पुस्तक खरीदने के लिए
क्लिक करें- "द डबल लाइफ ऑफ रामालिंगा राजू" वो भी 25 प्रतिशत छूट पर!












Click it and Unblock the Notifications