Surya Grahan 2022: दिवाली के बाद लगेगा सूर्य ग्रहण का सूतक, जानें कब करनी है गोवर्धन पूजा

Surya Grahan & Govardhan Puja: दीपों के पर्व दिवाली का पर्व 24 अक्टूबर यानी आज है। यूं तो दिवाली को पांच दिनों का पर्व माना जाता है, लेकिन इस बार दिवाली के अगले दिन सूर्य ग्रहण लगने की वजह से त्योहारों के दिनों की गिनती को लेकर कन्फ्यूजन पैदा हो गया है। दरअसल, दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है और उसके अगले दिन भाई-बहन का त्योहार यानी कि भाईदूज मनाया जाता है लेकिन अब चूंकि सूर्यग्रहण लग रहा है तो उसमें पूजा-पाठ वर्जित होता है ऐसे में बड़ा प्रश्न ये है कि फिर गोवर्धन पूजा कैसे और कब होगी?

Surya Grahan & Govardhan Puja

आपको बता दें कि कार्तिक अमावस्या 25 अक्टूबर 2022 मंगलवार को खंडग्रास सूर्य ग्रहण लग रहा है, जो कि शाम को 4 बजकर 41 मिनट पर शुरू होगा और शाम को 6 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगा। जब भी कोई ग्रहण लगता है कि उसका सूतक काल ग्रहण काल से 12 घंटे पहले लग जाता है। ऐसे में गोवर्धन पूजा 25 अक्टूबर को होगी ही नहीं बल्कि अगले दिन यानी कि 26 अक्टूबर को होगी, इस पूजा का शुभ मुहूर्त 26 अक्टूबर को 06: 36 AM से 08: 55 AM तक है।

Surya Grahan & Govardhan Puja

और इसी दिन दोपहर 02 बजकर 42 मिनट से द्वितीया तिथि लग जाएगी तो आप इस दिन भाई-दूज का टीका कर सकते हैं लेकिन जो लोग उदयातिथि को मानते हैं, वो तो ये त्योहार 27 अक्टूबर को मनाएंगे, द्वितीया तिथि 27 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक है।

'अन्नकूट'

आपको बता दें कि 'गोवर्धन पूजा' को ही 'अन्नकूट' भी कहते हैं, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और उन्हें 56 तरह का भोग लगाते हैं और प्रभु श्रीकृष्ण से घर के लिए सुख, शांति की प्रार्थना करते हैं।

  • गोवर्धन भगवान की आरती श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
  • तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े, तोपे चढ़े दूध की धार।
  • तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
  • तेरी सात कोस की परिकम्मा, और चकलेश्वर विश्राम तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
  • तेरे गले में कण्ठा साज रहेओ, ठोड़ी पे हीरा लाल।
  • तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
  • तेरे कानन कुण्डल चमक रहेओ, तेरी झाँकी बनी विशाल।
  • तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
  • गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण।
  • करो भक्त का बेड़ा पार तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
अन्नकूट

तो वहीं भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक भाई-दूज त्योहार पूरे धूम-धाम से उत्तर भारत में मनाया जाता है। इस दिन हर भाई के मस्तक पर बहनें टीका करती हैं और उनकी लंबी आयु और तरक्की की कामना करती हैं।

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