कृष्ण ने किया था 16 हजार कन्याओं से विवाह!

नई दिल्ली। कृष्ण लीला यानि कभी ना समाप्त होने वाली मनोहारी कथाओं की अनंत यात्रा, जिसका हर भाग ऐसे आधार पर अवलंबित है कि उन पर सहज ही मन रीझ जाता है, विश्वास पनप ही जाता है, प्रेम जाग ही जाता है। संक्षेप में कहें तो स्त्री हो या पुरूष, हर मन राधा के भाव में भीग ही जाता है। कहा जाता है कि कृष्ण के बाल्यकाल की लीला नगरी गोकुल की हर गोपी उनके प्रेम में दीवानी थी।

इन सबके साथ कृष्ण ने महारास रचाया था, जिसे प्रेम का महापर्व कहा जाता है। इसी तरह मथुरा में उनके राजकीय वैभव की गाथा में रूक्मणी समेत कितनी ही रानियों का वर्णन मिलता है। इसी क्रम में एक कथा ऐसी भी आती है, जिसमें कृष्ण द्वारा एक साथ 16 हजार कन्याओं से विवाह करने का वर्णन मिलता है।

आइये, आज जानें असंभव सी जान पड़ती इस करूण और मधुर कथा का सच

कृष्ण कंस का वध कर मथुरा के राजा बन चुके थे

कृष्ण कंस का वध कर मथुरा के राजा बन चुके थे

यह उस समय की बात है जब कृष्ण कंस का वध कर मथुरा के राजा बन चुके थे। सब कुछ सामान्य गति से चल रहा था, प्रजा सुखी और संपन्न थी और हर तरफ आनंद का वातावरण था। इसी समय श्री कृष्ण को एक असामान्य सी सूचना मिली कि उनके और आस पास के अनेक राज्यों से कुमारी कन्याओं का हरण किया जा रहा है।

मानसिक रूप से विक्षिप्त

मानसिक रूप से विक्षिप्त

गुप्तचरों को हर तरफ दौड़ाने के बाद यह सूचना सच पाई गई और यह भी पता चला कि मानसिक रूप से विक्षिप्त एक व्यक्ति इन कन्याओं का हरण बलि देने के लिए कर रहा है और इनकी संख्या बहुत अधिक है। भगवान कृष्ण ने त्वरित गति से ना सिर्फ उस व्यक्ति और स्थान की खोज की, बल्कि उसे मृत्युदंड देकर सभी कन्याओं को मुक्त करवाकर उनके घर भेज दिया। अब यहीं से असल कहानी शुरू होती है।

कन्याओं की संख्या 16 हजार

कन्याओं की संख्या 16 हजार

कहा जाता है कि कृष्ण द्वारा मुक्त कराई गई इन कन्याओं की संख्या 16 हजार थी। लंबे समय से अपनों से बिछड़कर दयनीय जीवन जी रही ये कन्याएं जब घर पहुंचीं, तो उनके घरवालों ने उन्हें अपनाने से मना कर दिया। उनके माता-पिता का कहना था कि अब उन कन्याओं का चरित्र कलंकित हो गया है। अब समाज उन्हें अपना नहीं सकता और उन्हें घर में शरण देकर वे समाज में अपमान नहीं झेल सकते। इन सभी कन्याओं ने अपने अभिभावकों से दया की गुहार लगाई कि अगर उन्हें नहीं अपनाया, तो वे कहां जाएंगी?

तुम्हें कहां रहना है

तुम्हें कहां रहना है

अपनी रोती कलपती कन्याओं को देखकर भी घर वालों का दिल नहीं पसीजा और उन्होंने टका सा जवाब दे दिया कि जिस कृष्ण ने तुम्हें बचाया, उसी से पूछो कि तुम्हें कहां रहना है? तुम सब घर से बाहर पराए पुरुष की शरण में रह चुकी हो, ऐसी चरित्रहीन कन्याओं से हमारा कोई संबंध नहीं है।

कृष्ण ने महाविवाह संपन्न किया

कृष्ण ने महाविवाह संपन्न किया

घर से ठुकराए जाने पर ये सभी कन्याएं एक एक कर मथुरा जा पहुंची और कृष्ण से मदद की गुहार लगाने लगीं। भगवान कृष्ण ने जब सारी बात सुनी तो वे द्रवित हो उठे। उन्होंने कहा कि अपहरण का दंश झेल रही, अपनों की याद में तरस रही इन कन्याओं का क्या दोष है? क्यों उन्हें उस अपराध का दंड दिया जा रहा है, जिसमें इनकी भागीदारी है ही नहीं। कोई किसी का बलात् अपहरण कर ले तो इसमें पीडि़त का क्या दोष। कृष्ण के समझाने पर भी कन्याओं के अभिभावक उन्हें यह कहकर अपनाने को तैयार नहीं हुए कि अब उनका मान चला गया है। इस बात से कृष्ण क्रोधित हो उठे और अपनी लीला के द्वारा 16 हजार रूपों में प्रकट हुए। उन्होंने हर एक कन्या का हाथ थाम उससे विधिवत विवाह किया और उसे सौभाग्य का वरदान दिया। कहा जाता है कि बंदीगृह से लौटी इन कन्याओं को ठुकराने वाले माता-पिता, कृष्ण से विवाह होते ही अपनी कन्याओं को अपनाने को तैयार हो गए। इस विवाह के बाद वे बड़े गर्व से बताते कि मथुरा के राजा कृष्ण उनके दामाद हैं। इस तरह 16 हजार कन्याओं को समाज में मान दिलाने के लिए कृष्ण ने महाविवाह संपन्न किया।

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