'कत्थक को प्रायोजक नहीं मिलते'

रविवार शाम एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पटना पहुंचे महाराज ने कहा, "कत्थक के लिए प्रायोजक नहीं मिलने से मैं काफी चिंतित और दुखी हूं। दरअसल इस नृत्य को पेश करने वाले कार्यक्रम काफी महंगे होते हैं। काफी कम लोग प्रायोजक बनने के लिए सामने आते हैं। "
महाराज ने कहा कि अब फिल्मों में शास्त्रीय नृत्यों को काफी कम शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "इन खबरों से मुझे दुख होता है। अब फिल्मकार भी अपने फिल्मों में कत्थक को शामिल करने से कतराते हैं। यदि मुड़कर देखें तो देवदास जैसी कुछ फिल्मों में ही कत्थक को शामिल किया गया था।"
महाराज ने फिल्मकार संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' के एक गीत 'काहे छेड़े मोहे.' की कोरियोग्राफी की थी और संगीत भी दिया था।
वैसे 71 वर्षीय कत्थक गुरु इस बात से खुश हैं कि युवा पीढ़ी, खासकर बच्चे कत्थक नृत्य सीखने के प्रति रूचि दिखा रहे हैं। वह लगभग 250 बच्चों को कत्थक सीखा रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह कत्थक के लिए अच्छा और सकारात्मक संकेत है। "
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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