Basant Panchami 2018: जानिए बसंत पंचमी से जुड़ी कुछ खास बातें
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नई दिल्ली। ऋतुराज बसंत के आने से केवल इंसान ही नहीं बल्कि देवता भी प्रसन्न हो जाते हैं। आम तौर पर बसंत पंचमी या श्रीपंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। लोग सुबह-सुबह पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती का ध्यान करते हैं और उनकी अराधना करते हैं। मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। इस दिन मां सरस्वती से विद्या और बुद्दि का वरदान मांगा जाता है क्योंकि मां सरस्वती बुद्दि, ज्ञान, शक्ति, कला और संगीत की देवी हैं, बिना इनके आशीष के कोई भी इंसान प्रगति-पथ पर आगे नहीं बढ़ सकता।
चलिए इस दिन के बारे में विस्तार से जानते हैं कुछ खास बातें...

भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा
- माघ महीने के पांचवे दिन भगवान विष्णु और रूप के देवता कामदेव की पूजा होती है।
- शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।

ऐतिहासिक महत्व
वैसे इतिहासकारों के हिसाब से बसंत पंचमी के ही दिन पृथ्वीराज चौहान जैसे वीर ने विदेशी हमलावर मोहम्मद गौरी का वध करके आत्मबलिदान दिया था, इसलिए भी यह दिन मानक है।

इस दिन होती है भगवान राम की पूजा...
गुजरात और मध्य प्रदेश में फैले दंडकारण्य इलाके के बारे में कहा जाता है कि यहीं पर मां सीता को खोजते हुए भगवान राम आये थे और यहीं पर मां शबरी का आश्रम था। जिस दिन भगवान राम ने शबरी के आश्रम में कदम रखा था और उनके झूठे बेर खाए थे, उस दिन बसंत पचंमी था इसलिए इस क्षेत्र के वनवासी इस दिन एक शिला को पूजते हैं, जिसके बारे में उनकी श्रध्दा है कि श्रीराम आकर यहीं बैठे थे।

महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्मदिन
बसंत पंचमी के ही दिन हिन्दी साहित्य की अमर विभूति महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्मदिन भी है इसलिए भी इसकी खास महत्ता है।












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