Sheetala Saptami 2022: शीतला सप्तमी-अष्ठमी पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, व्रत कथा और आरती
Sheetala Saptami 2022: शीतला सप्तमी-अष्ठमी पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, व्रत कथा
नई दिल्ली, 23 मार्च। होली के आठवें दिन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को शीतला सप्तमी पूजा मनाई जाती है। ये पूजा शीतला माता को प्रसन्न करने के लिए की जाती है। कहा जाता है कि जो लोग सच्चे मन से शीतला माता की पूजा करते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। उत्तर भारत में इस पूजा की बड़ी मान्यता है। शीतला सप्तमी के अगले दिन शीतला अष्टमी मनाई जाती हैं, इसे बसौड़ा (Basoda) के नाम से भी जाना जाता है।

शीतला सप्तमी का खास महत्व
कहा जाता है कि इस दिन शीतला माता को बासे भोजन का भोग लगाया जाता है, जिसके कारण लोग इसे बसौड़ा पूजा भी कहते हैं। इस पूजा में मान्या है कि सप्तमी की रात को ही हलवा और पूरी का भोग बना लिया जाता है, जिसे अष्टमी के दिन माता को अर्पित करते हैं। इस दिन कुछ जगहों पर हलवा पूरी तो कुछ जगहों पर चावल की खीर और कई जगहों पर गन्ने के रस में खीर बनाकर माता को अर्पित किया जाता है। इस पूजा में बासी भोग का खास महत्व है। माता को चढ़ाए जाने वाले सभी भोग को सप्तमी की रात को ही तैयार कर लिया जाता है।
24 को शीतला सप्तमी और 25 को शीतला अष्टमी की पूजा
शीतला माता अयोग्य़ प्रदान करने वाली देवी है। कहा जाता है कि माता की मन से पूजा की जाए तो घर से बीमारियां दूर रहती है। इस दिन घर की महिलाएं बच्चों के लिए, पति और परिवार के लिए शीतला माता का व्रत भी रखती हैं। 25 मार्च 2022, शुक्रवार को शीतला अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। आइए जानें इस पूजा के शुभ मुहूर्त, व्रत विधि, मंत्र और पूजन विधि के बारे में.....
शीतला सप्तमी पूजन की विधि और महत्व
शीतला सप्तमी के पूजन का खास महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन ठंडी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। सूर्योदय से पहले उठकर ठंडे जल से स्नान करें, शीतला माता को भी ठंडा जल अर्पित करें। श्रीफल फोड़कर उन्हें अर्पित करें और पानी में भिगोई हुई चने की दाल माता को चढ़ावें। शीतला सप्तमी की कथा सुनें और घर के मुख्य द्वार पर हल्दी से रंगे हाथों के छाप बनाए। माता को ठंडा जल अर्पित करें और उसी में से बचा थोड़ा सा जल घर में भी छिड़के। घर के बच्चों के सिर पर भी उस जल की छीटें डालें ।
शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
शीतला अष्ठमी का व्रत 25 मार्च 2022, शुक्रवार को रात 12:09 बजे से शुरू होगा, जो 25 मार्च 2022, शुक्रवार रात 10:04 बजे खत्म होगा। वहीं शीतला सप्तमी 24 मार्च को मनाया जाएगा। इस पूजा के लिए सप्तमी की शाम को ही घर की रसोई की साफ-सफाई करने के बाद माता के भोग की तैयारी करनी चाहिए। अगले सुबह यानी 25 मार्च को जल्दी स्नान करने के बाद शीतला माता के सामने फूल, अक्षत, धूप-दीप, जल, रोली, वस्त्र लेकर माना की पूजा आराधना करनी चाहिए। फिर शाम में बने भोग को माता के सामने रखकर उन्हें अर्पित करना चाहिए। शीतला माता के व्रत कथा और शीतला स्त्रोत का पाठ करना चाहिए।
शीतला माता आरती
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता
ओम् जय शीतला माता
रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भाता
ऋद्धि-सिद्धि चंवर ढुलावें, जगमग छवि छाता
ओम् जय शीतला माता
विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता
वेद पुराण वरणत, पार नहीं पाता
ओम् जय शीतला माता
इन्द्र मृदङ्ग बजावत, चन्द्र वीणा हाथा
सूरज ताल बजावै, नारद मुनि गाता
ओम् जय शीतला माता
घण्टा शङ्ख शहनाई, बाजै मन भाता
करै भक्तजन आरती, लखि लखि हर्षाता
ओम् जय शीतला माता
ब्रह्म रूप वरदानी, तुही तीन काल ज्ञाता
भक्तन को सुख देती, मातु पिता भ्राता
ओम् जय शीतला माता
जो जन ध्यान लगावे, प्रेम शक्ति पाता
सकल मनोरथ पावे, भवनिधि तर जाता
ओम् जय शीतला माता
रोगों से जो पीड़ित कोई, शरण तेरी आता
कोढ़ी पावे निर्मल काया, अन्ध नेत्र पाता
ओम् जय शीतला माता
बांझ पुत्र को पावे, दारिद्र कट जाता
ताको भजै जो नाहीं, सिर धुनि पछताता
ओम् जय शीतला माता
शीतल करती जननी, तू ही है जग त्राता
उत्पत्ति व्याधि बिनाशन, तू सब की घाता
ओम् जय शीतला माता
दास विचित्र कर जोड़े, सुन मेरी माता
भक्ति आपनी दीजै, और न कुछ भाता
ओम् जय शीतला माता
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता
ओम् जय शीतला माता












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