Shardiya Navratri 2024: आज से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ, क्या है कलश स्थापना का मुहूर्त?
Shardiya Navratri 2024 Aaj Hai: आस्था के मानक शारदीय नवरात्रि का इंतजार भक्तों को विशेष रूप से होता है। मां दुर्गा की पूजा के ये नौ दिन बेहद ही पावन होते हैं।
जो भी इन दिनों मां की पूजा सच्चे मन से करता है उसे हर तरह के सुख की प्राप्ति होती है। इन नौ दिनों में कई तरह के उत्सव होते हैं, कहीं पर कलश की स्थापना होती है तो कहीं पर गरबा खेला जाता है।

शारदीय नवरात्रि आश्विन मास में मनाई जाती है इस बार प्रतिपदा तिथि का आरंभ आज रात्रि 12 बजकर 19 मिनट से हो चुका है और तिथि का समापन 4 अक्टूबर को सुबह 2 बजकर 58 मिनट पर होगा।
उदयातिथि अनुसार इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आज से हुई है, जिसका समापन 12 अक्टूबर 2024 को होगा।
कलश स्थापना शुभ मुहूर्त (Kalash Sthapana Shubh Muhurat)
कलश स्थापना के लिए पहला शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 15 मिनट से 7 बजकर 22 मिनट तक का है।
शारदीय नवरात्रि 2024 के नौ दिन निम्नलिखित हैं...
- 3 अक्टूबर 2024 - मां शैलपुत्री (पहला दिन)
- 4 अक्टूबर 2024 - मां ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन)
- 5 अक्टूबर 2024 - मां चंद्रघंटा (तीसरा दिन)
- 6 अक्टूबर 2024 - मां कुष्मांडा (चौथा दिन)
- 7 अक्टूबर 2024, - मां स्कंदमाता (पांचवा दिन)
- 8 अक्टूबर 2024 - मां कात्यायनी (छठा दिन)
- 9 अक्टूबर 2024 - मां कालरात्रि (सातवां दिन)
- 10 अक्टूबर 2024- मां महागौरी (आठवां दिन)
- 11 अक्टूबर 2024 - महानवमी, (नौवां दिन)
- 12 अक्टूबर 2024- मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन
- 12 अक्टूबर 2024- दशमी तिथि (दशहरा)
मां दुर्गा की आरती (Maa Durga Aarti Lyrics)
- जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
- तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
- जय अम्बे गौरी
- माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
- उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
- जय अम्बे गौरी
- कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
- रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
- जय अम्बे गौरी
- केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
- सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
- जय अम्बे गौरी
- कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
- कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
- जय अम्बे गौरी
- शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
- धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
- जय अम्बे गौरी
- चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
- मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
- जय अम्बे गौरी
- ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
- आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
- जय अम्बे गौरी
- चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।
- बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
- जय अम्बे गौरी
- तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
- भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
- जय अम्बे गौरी।
Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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