शनि के वक्री होने से इन राशियों पर होगा असर, नहीं चाहते कोई परेशानी तो जरूर करें इस चालीसा का पाठ
Shani Vakri 2024: शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है। शनिदेव न्याय के देवता हैं, वो दंड भी देते हैं और पुरस्कार भी देते हैं। आपको बता दें कि शनिदेव 30 जून को वक्री हो रहे हैं और 15 नवंबर तक वक्री रहेंगे।
शनि के वक्री होने से 5 राशियों की बल्ले-बल्ले होने वाली है।जिन 5 राशियों के किस्मत खुलने वाली हैं उनके नाम हैं वृषभ , कन्या, तुला, धनु और मकर।

इन पांच राशियों को हर तरह से लाभ होने वाला है। ये सभी करियर में आगे बढ़ेंगे तो वहीं इन्हें आर्थिक लाभ और हर तरह से सुख की प्राप्ति होगी। इसलिए इन राशि के लोगों को हर शनिवार शनि चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए, ऐसा करने से इंसान को दोहरे फल की प्राप्ति होती है।
शनि चालीसा ( Shani Chalisa)
दोहा
- जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
- दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
- जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
- करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥
शनि चालीसा चौपाई :(Shani Chalisa Chaupai)
- जयति जयति शनिदेव दयाला।
- करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
- चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।
- माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥
- परम विशाल मनोहर भाला।
- टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
- कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।
- हिय माल मुक्तन मणि दमके॥
- कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
- पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥
- पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन।
- यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥
- सौरी, मन्द, शनी, दश नामा।
- भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥
- जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।
- रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥
- पर्वतहू तृण होई निहारत।
- तृणहू को पर्वत करि डारत॥
- राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।
- कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥
- बनहूँ में मृग कपट दिखाई।
- मातु जानकी गई चुराई॥
- लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।
- मचिगा दल में हाहाकारा॥
- रावण की गति-मति बौराई।
- रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥
- दियो कीट करि कंचन लंका।
- बजि बजरंग बीर की डंका॥
- नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।
- चित्र मयूर निगलि गै हारा॥
- हार नौलखा लाग्यो चोरी।
- हाथ पैर डरवायो तोरी॥
- भारी दशा निकृष्ट दिखायो।
- तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥
- विनय राग दीपक महं कीन्हयों।
- तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥
- हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।
- आपहुं भरे डोम घर पानी॥
- तैसे नल पर दशा सिरानी।
- भूंजी-मीन कूद गई पानी॥
- श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।
- पारवती को सती कराई॥
- तनिक विलोकत ही करि रीसा।
- नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥
- पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।
- बची द्रौपदी होति उघारी॥
- कौरव के भी गति मति मारयो।
- युद्ध महाभारत करि डारयो॥
- रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला।
- लेकर कूदि परयो पाताला॥
- शेष देव-लखि विनती लाई।
- रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥
- वाहन प्रभु के सात सुजाना।
- जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥
- जम्बुक सिंह आदि नख धारी।
- सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥
- गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
- हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥
- गर्दभ हानि करै बहु काजा।
- सिंह सिद्धकर राज समाजा॥
- जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।
पूरी चालीसा पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- शनि चालीसा का महत्व
Disclaimer: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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