Shani Pradosh Vrat 2025: करें इस चालीसा का पाठ होगा धन लाभ लेकिन इस काम से बचें वरना होगा विनाश

Shani Pradosh Vrat 2025: आज अश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी कि शनि प्रदोष व्रत है। यह व्रत भगवान शिव और शनि देव दोनों की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। आज जो कोई भी सच्चे मन से पूजा करता है, उसकी सारी मनोकामना पूरी होती है और सारे कष्टों का अंत होता है।

शनि प्रदोष व्रत की कथा (Shani Pradosh Vrat Katha)

एक बार शनि देव ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे उनके दोष से मुक्ति का कोई उपाय बताएं ताकि जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया का प्रभाव हो, वे उनकी शरण में आकर राहत पा सकें। तब भगवान शिव ने कहा -'जो व्यक्ति शनिवार के दिन प्रदोष काल में मेरी उपासना करेगा, नियमपूर्वक व्रत रखेगा और मन, वाणी तथा कर्म से पवित्र रहेगा, मैं स्वयं उस पर प्रसन्न रहूंगा। उसके जीवन से शनि के सभी दोष दूर होंगे। इसके बाद से ही शनिवार के प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष व्रत कहा जाने लगा।'

Shani Pradosh Vrat 2025

शनि चालीसा ( Shani Chalisa)

दोहा

  • जय-जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महराज।
  • करहुं कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज।।

चौपाई

  • जयति-जयति शनिदेव दयाला।
  • करत सदा भक्तन प्रतिपाला।।चारि भुजा तन श्याम विराजै।
  • माथे रतन मुकुट छवि छाजै।।
  • परम विशाल मनोहर भाला।
  • टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला।।
  • कुण्डल श्रवण चमाचम चमकै।
  • हिये माल मुक्तन मणि दमकै।।
  • कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
  • पल विच करैं अरिहिं संहारा।।
  • पिंगल कृष्णो छाया नन्दन।
  • यम कोणस्थ रौद्र दुःख भंजन।।
  • सौरि मन्द शनी दश नामा।
  • भानु पुत्रा पूजहिं सब कामा।।
  • जापर प्रभु प्रसन्न हों जाहीं।
  • रंकहु राउ करें क्षण माहीं।।
  • पर्वतहूं तृण होई निहारत।
  • तृणहंू को पर्वत करि डारत।।
  • राज मिलत बन रामहि दीन्हा।
  • कैकइहूं की मति हरि लीन्हा।।
  • बनहूं में मृग कपट दिखाई।
  • मात जानकी गई चुराई।।
  • लषणहि शक्ति बिकल करि डारा।
  • मचि गयो दल में हाहाकारा।।
  • दियो कीट करि कंचन लंका।
  • बजि बजरंग वीर को डंका।।
  • नृप विक्रम पर जब पगु धारा।
  • चित्रा मयूर निगलि गै हारा।।
  • हार नौलखा लाग्यो चोरी।
  • हाथ पैर डरवायो तोरी।।
  • भारी दशा निकृष्ट दिखाओ।
  • तेलिहुं घर कोल्हू चलवायौ।।
  • विनय राग दीपक महं कीन्हो।
  • तब प्रसन्न प्रभु ह्नै सुख दीन्हों।।
  • हरिशचन्द्रहुं नृप नारि बिकानी।
  • आपहुं भरे डोम घर पानी।।
  • वैसे नल पर दशा सिरानी।
  • भूंजी मीन कूद गई पानी।।
  • श्री शकंरहि गहो जब जाई।
  • पारवती को सती कराई।।
  • तनि बिलोकत ही करि रीसा।
  • नभ उड़ि गयो गौरि सुत सीसा।।
  • पाण्डव पर ह्नै दशा तुम्हारी।
  • बची द्रोपदी होति उघारी।।
  • कौरव की भी गति मति मारी।
  • युद्ध महाभारत करि डारी।।
  • रवि कहं मुख महं धरि तत्काला।
  • लेकर कूदि पर्यो पाताला।।
  • शेष देव लखि विनती लाई।
  • रवि को मुख ते दियो छुड़ाई।।
  • वाहन प्रभु के सात सुजाना।
  • गज दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना।।
  • जम्बुक सिंह आदि नख धारी।
  • सो फल ज्योतिष कहत पुकारी।।
  • गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
  • हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं।।
  • गर्दभहानि करै बहु काजा।
  • सिंह सिद्धकर राज समाजा।।
  • जम्बुक बुद्धि नष्ट करि डारै।
  • मृग दे कष्ट प्राण संहारै।।
  • जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।
  • चोरी आदि होय डर भारी।।
  • तैसहिं चारि चरण यह नामा।
  • स्वर्ण लोह चांदी अरु ताम्बा।।
  • लोह चरण पर जब प्रभु आवैं।
  • धन सम्पत्ति नष्ट करावैं।।
  • समता ताम्र रजत शुभकारी।
  • स्वर्ण सर्व सुख मंगल भारी।।
  • जो यह शनि चरित्रा नित गावै।
  • कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै।।
  • अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
  • करैं शत्राु के नशि बल ढीला।।
  • जो पंडित सुयोग्य बुलवाई।
  • विधिवत शनि ग्रह शान्ति कराई।।
  • पीपल जल शनि-दिवस चढ़ावत।
  • दीप दान दै बहु सुख पावत।।
  • कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
  • शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा।।

शिव चालीसा | Shiv Chalisa Lyrics in Hindi

दोहा ॥

  • श्री गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान।
  • कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

॥ चौपाई ॥

  • जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
  • सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
  • कानन कुण्डल नागफनी के ॥
  • अंग गौर शिर गंग बहाये ।
  • मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
  • वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
  • छवि को देखि नाग मन मोहे ॥
  • मैना मातु की हवे दुलारी ।
  • बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥
  • कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
  • करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
  • नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
  • सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
  • कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
  • या छवि को कहि जात न काऊ ॥
  • देवन जबहीं जाय पुकारा ।
  • तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥
  • किया उपद्रव तारक भारी ।
  • देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥
  • तुरत षडानन आप पठायउ ।
  • लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥
  • आप जलंधर असुर संहारा ।
  • सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥
  • त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
  • सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥
  • किया तपहिं भागीरथ भारी ।
  • पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥
  • दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
  • सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥
  • वेद नाम महिमा तव गाई।
  • अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥
  • प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
  • जरत सुरासुर भए विहाला ॥
  • कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
  • नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥
  • पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
  • जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥
  • सहस कमल में हो रहे धारी ।
  • कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥
  • एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
  • कमल नयन पूजन चहं सोई ॥
  • कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
  • भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥
  • जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
  • करत कृपा सब के घटवासी ॥
  • दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
  • भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥
  • त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
  • येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥
  • लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
  • संकट से मोहि आन उबारो ॥
  • मात-पिता भ्राता सब होई ।
  • संकट में पूछत नहिं कोई ॥
  • स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
  • आय हरहु मम संकट भारी ॥
  • धन निर्धन को देत सदा हीं ।
  • जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥
  • अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
  • क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥
  • शंकर हो संकट के नाशन ।
  • मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥
  • योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
  • शारद नारद शीश नवावैं ॥
  • नमो नमो जय नमः शिवाय ।
  • सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥
  • जो यह पाठ करे मन लाई ।
  • ता पर होत है शम्भु सहाई ॥
  • ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
  • पाठ करे सो पावन हारी ॥
  • पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
  • निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥
  • पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
  • ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
  • त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
  • ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥
  • धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
  • शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥
  • जन्म जन्म के पाप नसावे ।
  • अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥
  • कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
  • जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥
  • ॥ दोहा ॥
  • नित नेम कर प्रातः ही, पाठ करौ चालीसा।
  • तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
  • मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
  • अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥


शनि प्रदोष व्रत: क्या करें (Do's )

  • प्रातः स्नान और संकल्प करें
  • शाम के समय प्रदोषकाल (सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और बाद तक) में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, गंगाजल, शहद, चंदन आदि से अभिषेक करें।
  • भगवान शिव और शनिदेव के समक्ष तिल के तेल का दीपक अवश्य जलाएं।
  • 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का जाप करें।
  • तिल, काला कपड़ा, तेल, लोहा या उड़द दाल दान करें।

शनि प्रदोष व्रत में क्या न करें (Don'ts):

  • क्रोध और विवाद से बचें।
  • मांस-मदिरा का सेवन न करें।
  • झूठ न बोलें।
  • अन्याय या गलत कार्य न करें।
  • अशुद्ध अवस्था में पूजा न करें।

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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