Shani Pradosh Vrat 2022: उत्तरायण का पहला शनि प्रदोष 15 जनवरी को, जानिए पूजा विधि

नई दिल्ली, 14 जनवरी। सूर्य के उत्तरायण होने के अगले ही दिन 15 जनवरी 2022 को पहला शनि प्रदोष व्रत आ रहा है। मत मतांतर के कारण 15 जनवरी को भी मकर संक्रांति का पुण्यकाल माना जा रहा है, इसलिए यह शनि प्रदोष विशेष लाभप्रद सिद्ध होने वाला है। शनि प्रदोष का व्रत करने से शनि की पीड़ा तो शांत होती ही है, जो लोग शनि की साढ़ेसाती, ढैया आदि से परेशान चल रहे हैं उन्हें भी बड़ी राहत मिलती है। शनि प्रदोष का व्रत भगवान शिव की कृपा पाने के लिए किया जाता है। शनि प्रदोष व्रत करने से आर्थिक सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। जीवन में अचानक आने वाले संकटों से मुक्ति मिलती है। आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

उत्तरायण का पहला शनि प्रदोष 15 जनवरी को, जानिए पूजा विधि

शास्त्रों में प्रदोषकाल का विशेष महत्व बताया गया है। इसे शिव काल भी कहा जाता है। सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और बाद का समय प्रदोषकाल कहा जाता है। स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के कारण इस समय में थोड़ा अंतर आ सकता है।

कैसे करें शनि प्रदोष की पूजा

प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होकर पूजा स्थान में बैठकर प्रदोष व्रत का संकल्प लें। यह संकल्प सकाम और निष्काम दोनों प्रकार का हो सकता है। सकाम अर्थात् अपनी किसी मनोकामना की पूर्ति के लिए संकल्प लेना और निष्काम अर्थात् मात्र शिव कृपा प्राप्त करने के लिए। इसके पश्चात शिव परिवार का पूजन संपन्न करें और दिनभर निराहार रहकर व्रत रखें। सायंकाल प्रदोषकाल में शिव परिवार का विधिवत पूजन करें।

शनि प्रदोष व्रत के लाभ

  • शनि प्रदोष का व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए शिवजी का अभिषेक करने से सर्व सुखों की प्राप्ति होती है।
  • शनि प्रदोष के दिन शिवसहस्रनाम का पाठ करने से समस्त सुख भोग की प्राप्ति होती है।
  • इस व्रत के प्रभाव से आयु और आरोग्य में वृद्धि होती है। परिवार को संकटों से मुक्ति मिलती है।
  • शनि प्रदोष व्रत से शनिदेव को प्रसन्न किया जा सकता है। शनि की पीड़ा, साढ़ेसाती, ढैया आदि के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है।
  • शनि प्रदोष व्रत करने से कुंडली में बुरा प्रभाव दे रहा शनि शांत होता है।
  • शनि दोष के कारण जीवन में भागदौड़ अधिक रहती है और कोई भी कार्य आसानी से नहीं होता। शनि प्रदोष का व्रत करने से इन परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
  • शनि प्रदोष के दिन पीपल के वृक्ष की 108 परिक्रमा करते हुए विष्णु मंत्र का जाप करें तो अनेक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

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