Assam UCC Bill: असम में लिव-इन रिलेशनशिप होंगे रजिस्टर? बहुविवाह पर रोक से तलाक तक, बिल में क्या-क्या बदलेगा

Assam UCC Bill: असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सरकार ने 25 मई 2026 को विधानसभा में UCC बिल 2026 पेश किया, जिसमें पहली बार लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी ढांचे में लाने का प्रस्ताव रखा गया है।

इस बिल में बहुविवाह (Polygamy) पर रोक, शादी और तलाक का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और महिलाओं-बच्चों के अधिकारों को लेकर कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। अप्रैल 2026 में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अपने घोषणापत्र में यूसीसी लागू करने का वादा किया था, जिसके बाद 13 मई को हुई नई कैबिनेट की पहली ही बैठक में इस कानून को मंजूरी दी गई थी।

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इस ऐतिहासिक विधेयक पर मंगलवार, 26 मई को विस्तृत चर्चा और मतदान होने की उम्मीद है। हालांकि, बिल के कई बारीक नियम अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं और इन्हें लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

Uniform Civil Code Assam Bill 2026: क्या है असम UCC बिल?

असम ने अपने यूसीसी बिल को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से उत्तराखंड के यूसीसी मॉडल को आधार बनाया है, जो जनवरी 2025 में लागू हुआ था। इसके बाद मार्च 2026 में गुजरात ने भी ऐसा ही बिल पास किया था। असम सरकार द्वारा पेश किया गया यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) बिल राज्य में अलग-अलग धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान नागरिक कानून लागू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह बिल रिकॉर्ड पर चर्चा का रास्ता खोलता है कि आखिर UCC समय की जरूरत क्यों है। सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं और बच्चों को ज्यादा कानूनी सुरक्षा मिलेगी और पारिवारिक मामलों में समान अधिकार सुनिश्चित होंगे।

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असम यूसीसी बिल के क्या हैं मुख्य प्रावधान?

असम का यह यूसीसी कानून मुख्य रूप से विवाह, तलाक, विरासत और लिव-इन पार्टनरशिप के नियमों को संहिताबद्ध करता है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण: असम में अब एक साथ रहने वाले (लिव-इन) जोड़ों को कानूनी तौर पर अपनी इस स्थिति का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए सरकार रजिस्ट्रार और प्रशासनिक मशीनरी की नियुक्ति करेगी।

महिलाओं और बच्चों को कानूनी सुरक्षा कवच: यदि कोई पुरुष लिव-इन पार्टनरशिप के बाद महिला को छोड़ देता है (Desertion), तो पीड़ित महिला को कानूनी सहायता और भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा, इस संबंध से पैदा होने वाले बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में समान उत्तराधिकार (Inheritance Rights) प्राप्त होगा।

बहुविवाह पर पूर्ण रोक: राज्य में एक से अधिक विवाह करने की प्रथा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

शादी की न्यूनतम उम्र और संपत्ति अधिकार: नए कानून के तहत सभी धर्मों के लिए शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र तय होगी और महिलाओं को पारिवारिक संपत्ति में पुरुषों के बराबर हक मिलेगा।

UCC Bill में क्या हैं वे बातें जो अभी स्पष्ट नहीं हैं?

भले ही विधेयक सदन में पेश कर दिया गया है, लेकिन इसके कई बारीक नियमों (Granular Details) को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। 27 मई को जब बिल के पूरे ड्राफ्ट पर बहस होगी, तब कई बातों पर स्थिति साफ होने की उम्मीद है:

  • लिव-इन में रहने के कितने दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा?
  • नियम का पालन न करने पर जुर्माने या जेल की सजा का क्या प्रावधान है?
  • पंजीकरण के लिए कौन-से दस्तावेज अनिवार्य होंगे और वेरिफिकेशन (सत्यापन) की प्रक्रिया क्या होगी?

किन समुदायों को इससे छूट मिली है?

असम सरकार ने राज्य के संवेदनशील सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखते हुए अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes - ST) को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा है। साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, असम की जनसांख्यिकी में अनुसूचित जनजाति (ST) कुल आबादी का 12.45% हिस्सा। वहीं मुस्लिम आबादी राज्य की कुल आबादी का 34.22% हिस्सा।

आदिवासियों को छूट देने के फैसले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समुदायों की अपनी अनूठी परंपराएं और प्रथाएं हैं, जिनमें सरकार हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। हालांकि, कांग्रेस, राइजोर दल और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित विपक्षी दलों ने इस जल्दबाजी का विरोध किया है और मांग की है कि बिल को पारित करने से पहले सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था।

क्या पूरे देश में लागू होगा UCC?

फिलहाल UCC राज्य स्तर पर लागू हो रहा है। लेकिन BJP शासित कई राज्यों में इसकी तैयारी चल रही है। गुजरात और उत्तराखंड के बाद अब असम ने भी इस दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है। मध्य प्रदेश में भी UCC ड्राफ्ट तैयार करने के लिए समिति बनाई गई है।

अब सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में केंद्र सरकार पूरे देश में एक समान नागरिक संहिता लागू करेगी? फिलहाल असम का यह बिल उसी दिशा में एक अहम राजनीतिक और कानूनी प्रयोग माना जा रहा है।

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