Pradosh vrat 2021: सावन प्रदोष व्रत आज, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि
नई दिल्ली, 05 अगस्त। सावन मास का प्रदोष व्रत 5 अगस्त को प्रारंभ होगा लेकिन अंत 6 अगस्त को होगा। शिव के प्रिय महीने में पड़ने वाला ये प्रदोष व्रत काफी मानक है। इस बार के व्रत में खास संयोग बन रहा है। इस बार व्रत के दिन हर्षण योग है, जिसे कि ज्योतिष में काफी शुभ योग गिना जाता है। नाम से ही स्पष्ट है कि ये योग हर्ष प्रदान करने वाला है। आपको बता दें कि एक महीने में दो बार प्रदोष व्रत पड़ता है।

- प्रदोष व्रत : 05-06 अगस्त
- प्रदोष व्रत प्रारंभ : 05 अगस्त को शाम 05 बजकर 09 मिनट
- प्रदोष व्रत अंत: 06 अगस्त की शाम 06 बजकर 28 मिनट
- हर्षण योग: 06 अगस्त को 01 बजकर 14 मिनट
- अभिजीत मुहूर्त: 05 अगस्त को सुबह 11:59 से 12:52 मिनट
- विजय मुहूर्त: 05 अगस्त को दोपहर 02:47 से से 03:34 मिनट
- गोधुली मुहूर्त: 05 अगस्त को शाम 07:05pm से 07:28 मिनट
पूजा विधि
- शिव के लिए रखा जाने वाला ये उपवास सुबह से रखा जाता है।
- लेकिन पूजा गोधूलि बेला में होती है।
- पूजा करने से पहले सारे व्रती पुनः स्नान करे और स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर ले।
- इसके बाद रंगोली बनाकर मंडप तैयार करें।
- कुश के आसन पर बैठ कर शिवजी की पूजा विधि-विधान से करें।
- ऊं नमः शिवाय मंत्र बोलते हुए शिवजी को जल अर्पित करें।
- इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर शिवजी का ध्यान करें।
- ध्यान के बाद, प्रदोष व्रत की कथा सुने अथवा पढ़ें।
- शिवजी की आरती करें, प्रसाद बांटे।

खास बातें
वैसे तो प्रदोष व्रत शिव जी के लिए होता है लेकिन चूंकि अभी सावन चल रहा है, ऐसे में शिव की पूजा अगर पार्वती संग की जाए तो इस व्रत का फल दोगुना हो जाता है। इसलिए कोशिश कीजिए हैं शिव-पार्वती की पूजा साथ में करें. अगर आप अपने पति संग शिव- पार्वती की पूजा करेंगे तो आपको सुख,सौभाग्य और शांति की प्राप्ति होगी।
इन मंत्रों से कीजिए शिव को प्रसन्न
- ॐ ब्रह्म ज्ज्ञानप्रथमं पुरस्ताद्विसीमतः सुरुचो वेन आवः, स बुध्न्या उपमा अस्य विष्ठाः सतश्च योनिमसतश्च विवः
- ॐ नमः श्वभ्यः श्वपतिभ्यश्च वो नमो नमो भवाय च रुद्राय च नमः. शर्वाय च पशुपतये च नमो नीलग्रीवाय च शितिकण्ठाय च
- छ मंत्र ॐ नमः पार्याय चावार्याय च नमः प्रतरणाय चोत्तरणाय च, नमस्तीर्थ्याय च कूल्याय च नमः शष्प्याय च फेन्याय च
- ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंपुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
- ऊँ नम: शिवाय,
- ऊँ महेश्वराय नम:,
- ऊँ शंकराय नम:
- ऊँ रुद्राय नम:
इन मंत्रों से कीजिए मां पार्वती को प्रसन्न
- ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नमः और ऊँ पार्वत्यै नमः ।
- ऊँ साम्ब शिवाय नमः और ऊँ गौर्ये नमः।
- मुनि अनुशासन गनपति हि पूजेहु शंभु भवानि।
- कोउ सुनि संशय करै जनि सुर अनादि जिय जानि।।
- हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया।
- मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।।












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