Sawan Ka somwaar: सावन का 5वां सोमवार आज, चारों ओर बम-बम भोले की गूंज, Video
Sawan ka somwaar: आज सावन का 5वां सोमवार है, चारों ओर भोलेनाथ की गूंज है, मंदिरों में सुबह से ही शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए भक्तों की होड़ मची हुई है। आपको बता दें कि इस बार सावन 59 दिनों का है इसलिए इस बार इस मास में आठ सोमवार पड़े हैं। आज का सोमवार अधिकमास का है, इसमें व्रत रखना बाध्य नहीं हैं ये तो भक्तों की श्रद्धा और इच्छा है कि वो आज अपने प्रभु के लिए उपवास रखें या ना रखें।

सावन का हर सोमवार अपने भक्तों को कुछ ना कुछ देता है, आज का मंडे भक्तों को शक्ति और यश प्रदान करने वाला है। अगर आज शिवभक्त सच्चे मन से प्रभु की पूजा करेंगे तो उन्हें यश, बल और सिद्धि की प्राप्ति होगी और उनके घर में सुख-शांति का वास होगा और वो सेहतमंद और प्रसन्न रहेंगे।
आज का दिन बेहद पावन, सारे प्रहर शुभ
आज का दिन बेहद ही पावन है, आज सारे प्रहर शुभ हैं, आज आप किसी भी वक्त शिव की पूजा करेंगे, आपको विशेष फल की प्राप्ति होगी। बता दें कि शिवलिंग पर बिल्वपत्र, धतूरा, आंकड़े के पुष्प अर्पित करने का विशेष महत्व होता है। ऐसा करने वाले व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है।
इन शिव मंत्रों से करें भोलेनाथ की पूजा
- ऊँ नम: शिवाय।।
- ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
- ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
- ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।
शिव आरती
- ओम जय शिव ओंकारा प्रभु हर शिव ओंकारा
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
- अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा
- ओम जय शिव ओंकारा प्रभु हर शिव ओंकारा
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
- अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा
- एकानन चतुरानन पंचांनन राजे स्वामी पंचांनन राजे
- हंसानन गरुड़ासन हंसानन गरुड़ासन
- वृषवाहन साजे ओम जय शिव ओंकारा
- दो भुज चारु चतुर्भूज दश भुज ते सोहें स्वामी दश भुज ते सोहें
- तीनों रूप निरखता तीनों रूप निरखता
- त्रिभुवन जन मोहें ओम जय शिव ओंकारा
- अक्षमाला बनमाला मुंडमालाधारी स्वामी मुंडमालाधारी
- त्रिपुरारी धनसाली चंदन मृदमग चंदा
- करमालाधारी ओम जय शिव ओंकारा
- श्वेताम्बर पीताम्बर बाघाम्बर अंगें स्वामी बाघाम्बर अंगें
- सनकादिक ब्रह्मादिक ब्रह्मादिक सनकादिक
- भूतादिक संगें ओम जय शिव ओंकारा
- करम श्रेष्ठ कमड़ंलू चक्र त्रिशूल धरता स्वामी चक्र त्रिशूल धरता
- जगकर्ता जगहर्ता जगकर्ता जगहर्ता
- जगपालनकर्ता ओम जय शिव ओंकारा
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका स्वामी जानत अविवेका
- प्रणवाक्षर के मध्यत प्रणवाक्षर के मध्य
- ये तीनों एका ओम जय शिव ओंकारा
- त्रिगुण स्वामीजी की आरती जो कोई नर गावें स्वामी जो कोई जन गावें
- कहत शिवानंद स्वामी कहत शिवानंद स्वामी
- मनवांछित फल पावें ओम जय शिव ओंकारा
- ओम जय शिव ओंकारा प्रभू जय शिव ओंकारा
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
- अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा
- ओम जय शिव ओंकारा प्रभू हर शिव ओंकारा
- ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
- अर्धांगी धारा ओम जय शिव ओंकारा












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