सावन: शिवलिंग के पूजन से जुड़ी बातें जो आप नहीं जानते हैं
[पं. दयानंद शास्त्री] सावन के महीने में भगवान शिव का पूजन करने से घर में सुख एवं समृद्धि आती है। सावन के इस पावन मौके पर हम आपको कुछ ऐसी बातें बतायेंगे, जिन्हें अपना कर आप भी अपने घर में खुशियां ला सकते हैं और आपकी मनोकामनाएं भी पूर्ण होंगी।
शिव का अर्थ है- कल्याण। "शिव "यह दो अक्षरों वाला नाम परब्रह्मस्वरूप एवं तारक है इससे भिन्न और कोई दूसरा तारक नहीं है। "तारकं ब्रह्म परमं शिव इत्य्क्षर द्वयं"।
भगवान शिव को सबसे प्रिय है 'अभिषेक'
भगवान शिव के बारे में- भगवान शंकर अत्यंत ही सहजता से अपने भक्तों की मनोकामना की पूर्ति करने के लिए तत्पर रहते हैं। भक्तों के कष्टों का निवारण करने में वे अद्वितीय हैं। समुद्र मंथन के समय सारे के सारे देवता अमृत के आकांक्षी थे लेकिन भगवान शिव के हिस्से में भयंकर हलाहल विष आया। उन्होंने बड़ी सहजता से सारे संसार को समाप्त करने में सक्षम उस विष को अपने कण्ठ में धारण किया तथा 'नीलकण्ठ' कहलाए। भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय मानी जाने वाली क्रिया है 'अभिषेक'।
क्यों किया जाता है शिवलिंग पर अभिषेक?
अभिषेक का शाब्दिक तात्पर्य होता है श्रृंगार करना तथा शिवपूजन के संदर्भ में इसका तात्पर्य होता है किसी पदार्थ से शिवलिंग को पूर्णतः आच्ठादित कर देना। समुद्र मंथन के समय निकला विष ग्रहण करने के कारण भगवान शिव के शरीर का दाह बढ़ गया। उस दाह के शमन के लिए शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा प्रारंभ हुई। जो आज भी चली आ रही है । इससे प्रसन्न होकर वे अपने भक्तों का हित करते हैं। इसलिए शिवलिंग पर विविध पदार्थों का अभिषेक किया जाता है।
स्लाइडर में तस्वीरों के साथ शिवलिंग के पूजन से जुड़ी ऐसी बातें जो आप नहीं जानते हैं।

शिवलिंग बनाकर पूजन
जो लोग किसी तीर्थ में 'मृतिका' के शिवलिंग बनाकर- उनका हजार बार अथवा लाख या करोड़ बार सविधि पूजन करते हैं, वे शिव स्वरूप हो जाते हैं।

मिटटी-बालू का शिवलिंग
जो व्यक्ति तीर्थ में मिटटी,भस्म, गोबर अथवा बालू का शिवलिंग बनाकर एक बार भी उसका सविधि पूजन करता है, वह दस हजार कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है।

क्या-क्या फल मिलते हैा
शिवलिंग का विधि पूर्वक पूजन करने से- मनुष्य -संतान, धन, धन्य, विद्या, ज्ञान, सद्बुद्धि, दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति करता है।

तीर्थ बन जाता है स्थान
जिस स्थान पर शिवलिंग का पूजन होता है, वह तीर्थ नहीं होते हुआ भी तीर्थ बन जाता है। जो शिव- शिव ,शिव नाम का उच्चारण करता है -वह परम पवित्र एवं परम श्रेष्ठ हो जाता है।

उस स्थान पर मृत्यु होने पर
जिस स्थान पर शिवलिंग का पूजन होता है, उस स्थान पर जिस मनुष्य की मृत्यु होती है- वह शिवलोक को प्रप्त करता है।

प्राण त्यागते वक्त शिव
भाव -जो मनुष्य शिव-शिव का स्मरण करते हुए प्राण त्याग देता है- वह अपने करोड़ों जन्म के पापों से मुक्त होकर शिवलोक को प्राप्त करता है।












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