Sawan 2024: सावन के प्रथम शुक्रवार को करें शालिग्राम की स्थापना, धन से भर जाएंगे भंडार
Sawan mai kare Shaligram ki Puja: जिस तरह भगवान शिव का निराकार रूप शिवलिंग होता है उसी प्रकार श्रीहरि विष्णु का निराकार रूप शालिग्राम होता है। श्रावण में शिवलिंग पूजन की तरह ही शालिग्राम पूजन का भी बड़ा महत्व होता है।
श्रीहरि विष्णु इस समय योगनिद्रा में होते हैं तो उनके निराकार रूप शालिग्राम का पूजन चातुर्मास में किया जाता है। विष्णु पुराण का कथन है कि जिस घर में शालिग्राम स्थापित होता है वह घर करोड़ों तीर्थों के समान हो जाता है और उस घर में निवास करने वाले सदा सुख-वैभव संपत्ति का भोग करते हैं।

शालिग्राम की स्थापना वैसे तो किसी भी दिन की जा सकती है किंतु श्रावण में शुक्रवार का दिन इसके लिए विशेष महत्व रखता है। श्रावण का पहला शुक्रवार 26 जुलाई को आ रहा है। इसलिए यदि आप भी अपने घर में सुख-संपत्ति और धन के भंडार भरना चाहते हैं तो शालिग्राम की स्थापना अवश्य करें।
कैसे करें शालिग्राम स्थापना
शालिग्राम को लाकर शुक्रवार के दिन एक तांबे या कांसे के बर्तन में रखकर पहले साधारण जल, फिर गंगाजल, फिर गौ दुग्ध, फिर साधारण जल और फिर गंगाजल से स्नान करवाकर अपने पूजा स्थान में पीले रेशमी कपड़े पर स्थापित करें। इसके बाद इसका पूजन अष्टगंध से करें, पीले पुष्प और तुलसी दल अवश्य अर्पित करें। शालिग्राम स्तोत्र का पाठ करें। या ऊं नमो नारायणाय मंत्र की एक माला तुलसी की माला से जाप करें। इसके बाद नित्य प्रतिदिन इसे स्नान करवाने के बाद पूजन करें और तुलसी दल अर्पित करें।
शालिग्राम की पूजा के लाभ
- शालिग्राम घर में होना अर्थात् साक्षात विष्णु भगवान के होने के समान है।
- शालिग्राम जिस घर में होता है वहां निवास करने से करोड़ों तीर्थों में निवास का पुण्य फल प्राप्त होता है।
- शालिग्राम के समक्ष किए गए किसी भी मंत्र जाप की सिद्धि शीघ्र होती है।
- शालिग्राम का नित्य पूजन-दर्शन सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य प्रदान करता है।
- शालिग्राम घर में रखने से परिवारजन में सामंजस्य आपसी संतुलन बना रहता है।
- शालिग्राम का नित्य पूजन स्नान करवाना आवश्यक है। इसे बिना पूजा के नहीं रखना चाहिए।












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